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मरीजों को लाने-ले जाने वाली एंबुलेंस खुद ही बनी पेसेंट
मरीजोंकोलाने और ले जाने वाली एंबुलेंस खुद ही बीमार है। ये एंबुलेंस या तो कंडम हो चुकी है या फिर इन्हें मरम्मत की दरकार है, लेकिन इसके बाद भी एंबुलेंस मरीजों को आने ले जाने में लगी हैं।
ऐसे में कभी भी ये एंबुलेंस मरीज को बीच रास्ते में धोखा दे सकती हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में 17 एंबुलेंस हैं। सभी ऑन रूट हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। आधा दर्जन एंबुलेंस तो ऐसी हैं जोकि तीन लाख किलोमीटर तक चल चुकी है। जबकि गाइड लाइन है कि 1.80 लाख किलोमीटर चलने पर गाड़ी को कंडम घोषित कर दिया जाता है।
लाइफपूरी होने पर भी दौड़ रही : गाइडलाइन के अनुसार अगर कोई भी सरकारी गाड़ी 1.80 लाख किलोमीटर तक चल जाती है तो वह कंडम घोषित कर दी जाती है।
वहीं एनआरएचएम के तरह दो लाख किलोमीटर से ज्यादा चलने पर एंबुलेंस को कंडम घोषित कर दिया जाता है। जबकि कई एंबुलेंस ढाई से तीन लाख किलोमीटर चल चुकी हैं। इसके बाद भी ये एंबुलेंस सड़कों पर दौड़ रही हैं। एंबुलेंस की हालत भी खराब हो चुकी है। जोकि कभी भी हादसे का कारण बन सकती है।
17एंबुलेंस हैं जिलें में : सरकारीअस्पतालों में 17 एंबुलेंस हैं। इनमें से एक दो हर दिन मैकेनिक के पास खड़ी रहती है। ऐसे में हर दिन 14 से 15 एंबुलेंस ही ऑन रूट रहती हैं। जबकि मरीजों की संख्या और जिले में जनसंख्या के हिसाब से 35 एंबुलेंस चाहिए। स्वाथ्य विभाग के अनुसार चार एंबुलेंस यमुनानगर सिविल अस्पताल, दो जगाधरी, एक रादौर, एक रसुलपुर, एक साढौरा, एक मुस्तफबाद, दो बिलासपुर, एक नाहरपुर, एक छछरौली, एक खिजराबाद और एक अन्य एंबुलेंस हैं।
इनको ज्यादा दिक्कत
स्वास्थ्यविभाग की ओर से डिलीवरी, सड़क हादसों में घायल, बीपीएल होल्डर के लिए मुफ्त एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई जाती है। अस्पताल से छुट्टी मिलने पर मरीजों को एंबुलेंस का वेट करना पड़ता है। समय पर जब एंबुलेंस नहीं मिलती तो मरीजों को प्राइवेट वाहन से घर ले जाना पड़ता है।
एकघंटे से खड़ा हूं
गांवबुबका निवासी देवेंद्र सिंह ने बताया कि उसकी प|ी की डिलीवरी हुई है। अस्पताल से जब डॉक्टर ने छुट्टी की तो उन्होंने तुरंत एंबुलेंस कंट्रोल रूम में फोन कर दिया था, लेकिन अभी तक उन्हें एंबुलेंस नहीं मिली है। कई बार फोन भी किया, लेकिन अभी इंतजार ही कर रहे हैं।
होतेरहते हैं हादसे
एंबुलेंसकंडम होने से हादसों का चांस भी बढ़ जाता है। कुछ दिन पहले बिलासपुर अस्पताल की एंबुलेंस का एक्सिडेंट हो गया था। वहीं बुधवार को ही एक एंबुलेंस ने कॉलेज स्टूडेंट्स को ले जा रहे ऑटो को टक्कर मार दी। इसमें छात्राएं घायल हो गई हैं।
मांगभेजी गई है
सीएमओडॉ. वीपी मान का कहना है कि सभी को एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाती है। छह एंबुलेंस के लिए मांग भेजी गई है। जो एंबुलेंस हैं उनकी समय पर मरम्मत कराई जाती है।
तीन साल से कबाड़ बनी है एंबुलेंस। अब रही कबाड़ रखने के काम। (ऊपर) पीड़ा व्यक्त करता देवेन्द्र, एंबुलेंस की इंतज़ार में खड़ी प्रसूता।