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पहाड़ों में बर्फ गिरने से यमुना का जलस्तर बढ़ा
उत्पादन के लिए 56 सौ क्यूसिक पानी
>10129 क्यूसिक पानी दर्ज किया गया
भास्करन्यूज| छछरौली
पहाड़ोंमेंबर्फबारी के चलते यमुना के जलस्तर में सुधार हुआ है। जलस्तर कम होने का सीधा असर यहां स्थित चारों पनबिजली इकाइयों पर पड़ रहा था। जहां पहले प्रतिदिन बिजली के होने वाले उत्पादन में कमी रहा करती थी वहीं, आजकल अच्छी खासी बढ़ौतरी हो रही है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब तो जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। हथनी कुंड बैराज पर मंगलवार को कुल 10 हजार 129 क्यूसिक पानी दर्ज किया गया। मांग के मुताबिक पश्चिमी यमुना नहर में 8135 क्यूसिक, यूपी में 1834 क्यूसिक और यमुना नदी में 160 क्यूसिक पानी की सप्लाई दी गई। अब धीरे-धीरे यमुना के जल स्तर मेंं बढ़ौतरी हो रही है। जिसका सीधा लाभ हाइडल विभाग के चारों पनबिजली इकाइयों भूड़कलां, नैनोवाली और बेगमपुर में 8.8 मेगावाट की दो-दो इकाइयों ताजेवाला में 6.1 मेगावाट की दो-दो इकाइयां पर पड़ रहा है। कई बार यहां यमुना का जलस्तर 1992 क्यूसिक से भी कम रह जाता है। जिसका सीधा असर चारों पनबिजली इकाइयों के बिजली उत्पादन पर पड़ता था मगर अब बिजली उत्पादन कायदे से हो रहा है।
इस बारे में सिचाई विभाग के एसडीओ चांदी राम का कहना है कि अब तो यमुना के पानी में बढ़ौतरी हो रही है। कई बार तो इस महीने के अंदर बाढ़ तक जाती है।
पनबिजलीपरियोजना पर आधारित चारों इकाइयों की दो-दो यूनिटों को चलाने के लिए 5600 क्यूसिक पानी की जरूरत होती है। उसके बाद ही यहां 12 से 13 लाख यूनिट बिजली उत्पादन प्रतिदिन हो सकता है। पहाड़ों में बर्फबारी के चलते यमुना का जलस्तर नीचे गिर जाता है। कई बार हाइडल को 2440 क्यूसिक पानी की आपूर्ति भी नहीं हो पाती। ऐसे में उत्पादन में गिरावट जाती है। कई बार तो उत्पादन घट कर केवल 2 से 3 लाख यूनिट ही रह जाता है। अब जलस्तर पर सुधार होने पर हाइडल में जरूरत के मुताबिक 5600 क्यूसिक पानी छोड़ा जा रहा है।