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विकास की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश अब क्योड़क गांव में रुकेंगी लंबे रूट की सभी बसें

7 वर्ष पहले
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खुद के साथ घटी घटना के बाद उठाया विकास ने कदम

हाईकोर्टनेएक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए गांव क्योड़क के बस अड्डा पर सभी बसें रुकवाने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए डीजी रोडवेज जीएम को इसे सख्ती से लागू करने के आदेश दिए हैं। बसें रुकने से क्योड़क के साथ लगते आठ गांवों के लोगों को परेशानी रही है।

गांव क्योड़क के विकास ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका डाली थी। विकास का तर्क था कि नियमानुसार यहां पर लंबे रूट की सभी बसों को रुकने के आदेश रोडवेज विभाग ने दिए हुए हैं। लेकिन ज्यादातर चालक परिचालक आदेशों की पालना नहीं कर रहे हैं। प्रतिदिन हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

गांव क्योड़क की आबादी 12 हजार है। इसके अलावा दयौरा, नौच, बलवंती, जसवंती, उझाना, बरोट, डेरा चांदीपुरा नीलम यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी भी इसी बस अड्डा से बसों में चढ़ते हैं। डायरेक्टर जनरल स्टेट ट्रांसपोर्ट हरियाणा जीएम ने पहले ही यहां पर बसें रुकवाने के आदेश दिए हैं। लेकिन बसों के चालक परिचालक उनके आदेशों की पालना नहीं कर रहे हैं। हाईकोर्ट के जज हरविंद्र सिंह सिंधू ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए डीजी रोडवेज को इस फैसले को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए हैं। कैथल जीएम के अलावा, अम्बाला, जींद, हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी यमुनानगर के जीएम को भी क्योड़क बस अड्डा पर बस रोकने के फैसले की कॉपी भेजी है। बस अड्डा पर एक कर्मचारी की ड्यूटी लगाकर एक रजिस्‍टर लगाने के आदेश दिए हैं। रजिस्‍टर में किस डिपो की बस कितने बजे रुकी। पूरा हिसाब रखा जाए।

विकास ने बताया कि वह 19 नवंबर 2013 को चंडीगढ़ से गांव क्योड़क रहा था। भिवानी रोडवेज के परिचालक ने क्योड़क गांव में बस रोकने से मना कर दिया। इसके बाद उसने क्योड़क चौकी में फोन कर इसकी शिकायत की। पुलिस वालों ने ही नाका लगाकर बस को रुकवाया। चौकी में परिचालक के खिलाफ डीडीआर भी लिखवाई थी। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद विकास ने इस मुद्दे को कोर्ट में ले जाने की सोची और इस संबंध में हाईकोर्ट में जनहित याचिका डाल दी।