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गुहला चीका में प्रदेश केंद्र सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

5 वर्ष पहले
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खाद-बीज दवा विक्रेता संघ ने बंद रखीं दुकानें

नईशर्तलागू करने के विरोध में खाद-बीज दवाई विक्रेता संघ ने अपनी दुकानें बंद रखी। दुकानें बंद रहने से किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। संघ सदस्य कीटनाशक संबंधित अधिसूचना का विरोध कर रहे हैं। एक्ट के अनुसार खाद दवाई विक्रेताओं को दो साल में विज्ञान स्नातक की डिग्री प्राप्त करनी होगी। संघ के सदस्यों ने डीसी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा।

जयकिशन शर्मा, मांगेराम कैलरम, राजकुमार बल्ली ने कहा कि नए एक्ट के अनुसार दो साल में विज्ञान से स्नातक की डिग्री नहीं ली जा सकती। इसमें कई अड़चने हैं। इसमें लाइसेंसधारकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। ज्यादातर दुकानदार चार वर्ष की नियमित पढ़ाई नहीं कर सकते। इसका कारण कम उम्र, स्थान अन्य परिस्थितियां है। व्यापारी का दायरा समिति है और विज्ञान स्नातक धारकों की संख्या भी बहुत कम है। इसलिए पात्र व्यक्ति को सहकर्मी के रूप में रख पाना संभावना नहीं है। आर्थिक दृष्टि से कर्मचारी रखना संभव नहीं हो पाएगा। दुकानदार ग्राहक का नाता विश्वास का होता है। हम किसानों को हर परिस्थिति बीज, खाद दवाई उपलब्ध करवाते हैं। मांगेराम ने कहा कि अपनी आजीविका मानकर व्यापार करने वाले डीलर को अपने जीने के अधिकार से वंचित करना न्याय संगत नहीं है। हरियाणा प्रदेश में एक लाख से ज्यादा लोग इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। मेडिकल के क्षेत्र में जब तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था लागू की गई थी, तब पुराने व्यवसायियों को नियमित रखा गया था। इस पात्रता के स्थान पर पुराने व्यवसायियों को कृषि विकास केंद्र अथवा मंडी स्तर पर कृषि विभाग द्वारा प्रशिक्षण की व्यवस्था लागू की जा सकती है।

दुकानदार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा सिफारिश की गई दवाइयों को ही किसानों को बेचते हैं। कृषि क्षेत्र में कीटनाशक को लेकर खेतों में बीमारी दिखाई देती है। उसके निदान उपचार क्या दवाई डालनी है इसके लिए कृषि विभाग ने एडीओ लगाए हुए हैं। जो समय-समय पर किसानों को दवाई डालने के लिए प्रेरित करते हैं। दुकानदार केवल खाद दवाई किसानों को देते हैं। विक्रेता केवल स्टॉकिस्ट का काम करता है। उन्होंने कहा कि किसान व्यापारी के हित को देखते हुए इस पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। जो पुराने व्यवसायी हैं उन्हें नियमित करें। इस अवसर पर हरीचंद, रामपाल, शुभम, गुलाब, अश्वनी, गुलाब, पवन, सुरेंद्र, रमेश, राकेश, रमेश कुमार, जोगिंद्र उपस्थित रहे।

सरकार की अधिसूचना से छिन जाएगा रोजगार : दीपक

पूंडरी|खाद, बीज दवाई विक्रेताओं ने केंद्र सरकार की कीटनाशक उर्वरक विक्रेता लाइसेंस के लिए शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य करने के संबंध में अपना रोष जाहिर करते हुए एक दिन की हड़ताल की और अपनी दुकानें बंद रखी। दवाई विक्रेता दीपक कुमार ने बताया केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के लागू होने से पेस्टीसाइड एंड फर्टीलाइजर व्यवसाय से जुड़े दुकानदारों का रोजगार छीन जाएगा। मौके पर नाभ सिंह, राज, सतपाल, शुभम, हरिचंद, रामपाल, सुभाष, सुलतान, गुलाब, ईश्वर, अश्वनी, रिंकू, राजकुमार, नवनीत आदि मौजूद थे। वहीं आज दुकानें बंद होने के कारण जिन किसानों को अपनी गेहूं की फसल में दवाई डालनी थी, दुकानें बंद होने के कारण उन्हें आज खाली हाथ लौटना पड़ा।

कलायत में भी दुकानें बंद रख जताया रोष

कलायत|खाद बीज कीटनाशक दवा विक्रेताओं ने सरकार के फैसले के विरोध स्वरूप अपनी-अपनी दुकानें बंद कर रोष प्रकट किया। पेस्टीसाइड डीलर एसोसिएशन के सदस्य कृष्ण कुमार, अमरदीप, राजकुमार, सुरेंद्र, अनिल, पवन ने बताया कि सरकार द्वारा बीज कीटनाशक दवाइयों के लाइसेंस के लिए 5 नवंबर 2015 से दो वर्षों में बीएससी एग्री कलचर या समकक्ष योग्यता पूरी करने के लिए समय सीमा तय की गई है। उन्होंने कहा कि कई दुकानदार वर्षों से पुराने लाइसेंसों पर कार्य कर रहे हैं और अब वो अपनी दुकानदारी करेंगे या सरकार द्वारा निर्धारित की गई पढ़ाई को पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि पुराने लाइसेंसों को निरस्त करके नए लाइसेंसों पर बीएससी एग्री कलचर या समकक्ष की योग्यता पूरी करने के लिए 2 वर्ष के कार्यकाल को बढ़ाकर 5 वर्षों तक किया जाना चाहिए।

दवाई विक्रेताओं के खिलाफ थोपी गई शर्तों के खिलाफ प्रदर्शन करते दवाई विक्रेता।

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