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बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए चलाए जा रहे हैं 13 शिशु पालन केंद्र
जिलाबालकल्याण परिषद द्वारा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए 13 शिशु पालन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों में कामकाजी माता-पिता के बच्चों को खेल गतिविधियां मानसिक विकास के लिए विशेष क्रियाकलाप कराए जाते हैं। इन केंद्रों पर 310 बच्चे लाभ उठा रहे हैं।
जिला बाल कल्याण परिषद के अध्यक्ष एवं डीसी केएम पांडुरंग ने बताया कि जिन 13 स्थानों पर शिशु पालन केंद्र चलाए जा रहे हैं, उनमें नानकपुरी कॉलोनी, गांव कौल, गुहणा, सीवन, पूंडरी, छौत, कलायत, चंदलाना, करोड़ा, भाणा, जिला कारागार कैथल तथा बिशनगढ़ गामड़ी शामिल है। उन्होंने बताया कि परिषद द्वारा जिन बच्चों को देखभाल की जरूरत है, उनके लिए ओपन बाल आश्रय गृह चलाया जाएगा, जिसमें एक साथ 25 बच्चों के रखने की क्षमता होगी। ओपन बाल आश्रय गृह के लिए परियोजना समन्वयक एवं परामर्शदाता, एक सामाजिक कार्यकर्ता, दो एजुकेटर, तीन आउटरिच वर्कर एक हेल्पर बच्चों की परवरिश के लिए लगाए गए हैं। परिषद द्वारा सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग की मदद से चीका में नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र भी चलाया जा रहा है।
नशामुक्ति केंद्र में छुड़ाया जा रहा नशा
इसकेंद्र में नशा पीड़ितों को व्यसन से छुटकारा दिलाने के लिए नि:शुल्क उपचार दिया जाता है। पिछले एक वर्ष में 205 ऐसे पीड़ितों का उपचार किया गया। संस्था द्वारा बच्चों को गोद देना लेने के लिए इच्छुक माता-पिता को सही जानकारी देकर गोद लेने की औपचारिकताएं मुख्यालय स्तर पर पूरी कराई जाती है। परिषद द्वारा रविवारीय कोचिंग कक्षाएं, सिलाई-कटाई केंद्र, गृह कार्य कक्षाएं, डे-केयर सेंटर, केश एवं त्वचा सज्जा केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। जिला बाल कल्याण अधिकारी सुशील पांचाल ने बताया कि वित्त वर्ष के दौरान लोगों को जागरूक करने के लिए अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस आदि का आयोजन किया गया है। परिषद द्वारा बाल दिवस के उपलक्ष्य में भी बच्चों के मानसिक शारीरिक विकास के लिए चित्रकला प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, समूह गान प्रतियोगिता मेहंदी रचाओ प्रतियोगिता करवाकर बच्चों की प्रतिभा को निखारने का काम किया जाता है।