जीरी के भावों में स्थिरता के संकेत
एकसप्ताहतक उतार चढ़ाव के बाद अब एशिया की प्रमुख अनाज मंडी चीका में जीरी के भावों में स्थिरता के संकेत मिलने लगे हैं जिसके चलते किसानों ने राहत की सांस ली है। पिछले कुछ दिनों से 1509 किस्म की जीरी का मूल्य लगातार गिर रहा था जिस कारण पंजाब से आने वाली जीरी की आवक भी कम होने लगी थी। लेकिन अब कल से केवल जीरी के रेटों में स्थिरता आई है, अलबत्ता किसानों को 50 रुपए प्रति क्विंटल की मामूली राहत भी मिली है। हालांकि किसान इसे काफी कम राहत मानकर चल रहे हैं। राइस मिल एसोसिएशन के पूर्व प्रधान श्रवण जिंदल ने कहा कि मंडी में जीरी की खरीद उठान का काम सुचारू रूप से चल रहा है। राइस मिल मालिकों द्वारा किसानों को उनकी जीरी का उचित मूल्य दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह लोकल स्तर पर होकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होता है, नतीजतन जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चावलों के रेट में उछाल आता है तो किसानों को उनकी फसल के ज्यादा दाम मिलते हैं और मंदी के साथ ही जीरी के रेटों में भी मंदी का दौर शुरू हो जाता है।
एक सप्ताह तक उतार चढ़ाव के बाद अब किसानों ने ली राहत की सांस
समय निश्चित हो
जीरीकी बढ़ती आवक मंडी में जाम की पैदा हो रही स्थिति से निपटने के लिए अब हर सीजन की भांति इस बार भी आढ़तियों मंडी में काम करने वाले मजदूरों की तरफ से यह मांग उठने लगी है कि किसानों द्वारा मंडी में जीरी लाने का समय निश्चित किया जाए।
हर सुविधा मिले : गौड़
अनाजमंडी का दौरा करने पर भारतीय किसान यूनियन के प्रधान पाला राम गौड़ ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि वह सीजन के दौरान किसानों को हर सुविधा उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि यूं तो प्रशासन की तरफ से कई इंतजाम किए गए हैं। उसके बावजूद किसानों को रोजमर्रा की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।