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- 48 सायफन रेत से फुल, पानी क्रॉसिंग में रूकावट सफाई हुई और पानी बढ़ा तो स्थिति खतरनाक
48 सायफन रेत से फुल, पानी क्रॉसिंग में रूकावट सफाई हुई और पानी बढ़ा तो स्थिति खतरनाक
हरियाणा-पंजाबसीमापर घग्गर नदी उपमंडल गुहला के गांव खंबेड़ा सरोला के बीच घग्गर नदी से गुजरने वाली हांसी-बुटाना नहर की क्रॉसिंग के लिए बनाए गए 48 सायफन घग्गर नदी में बहने वाले पानी के साथ आए रेत से लगभग बंद हो चुके हैं। ये घग्गर नदी के दूसरी तरफ पंजाब में बसने वाले किसानों के लिए भी परेशानी का कारण बन गए हैं। किसानों का कहना है कि यदि बरसात आई तो सायफन बंद होने से यहां तबाही का मंजर दिखाई दे सकता है। सायफन को खाली करने के लिए जब खुदाई का ठेका दिया जाता है तो संबंधित ठेकेदार रेत खुदाई के नाम पर घोटाला कर जाते हैं। किसानों ने यहां पर सरसों उगाकर जगहों को घेरा हुआ है। कुल मिलकर यदि समय रहते सफाई नहीं हुई और पानी बढ़ता है तो स्थिति खतरनाक हो सकती है।
किसान गुरमेल सिंह, श्याम सिंह, जोगिंद्र सिंह, पाला राम, बच्चन सिंह, जोरा सिंह, जगदीश, देसराज भूपेंद्र सिंह ने बताया कि ठेकेदार घग्गर नदी में पड़े सूखे रेत को तो बेच देता है। जब कुछ फुट रेत खोदने के बाद रेत गीला निकलने लगता है और दलदल जैसी स्थिति बन जाती है तो ठेकेदार दलदल में जेसीबी मशीन चलने का बहाना बनाकर काम छोड़कर चला जाता है। उसे कोई रोकने वाला नहीं होता। किसानों का आरोप है कि दलदल के नाम पर जहां सूखा रेत बेचकर ठेकेदार करोड़ों रुपए कमा लेता है, वहीं कथित रूप से अधिकारियों की जेबें भी गर्म हो जाती हैं।
गुहला चीका |बरसात आने पर तबाही की आशंका व्यक्त करते हांसी-बुटाना नहर के उक्त पुल के आसपास रहने वाले किसान श्याम सिंह अन्य लोग।
गुहला चीका |सायफन के आसपास जमा रेत में उगी सरसों की फसल।
गुहला चीका |घग्गर नदी के बंद पड़े सायफन, जमा रेत साफ दिखाई दे रहा है।
घग्गर नदी के तटों को बाढ़ के पानी से टूटने से बचाने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा घग्गर नदी के साथ-साथ बनाई गई टो-वाल ही अब किसानों के लिए खतरे का कारण बनती जा रही है। पीछे से आने वाले पानी को टो-वाल रोककर घग्गर के तटों को तो सुरक्षित कर देगी, पर टो वाल की सीमा खत्म होने के बाद पुल पर पीछे से आने वाले पानी का प्रेशर बढ़ जाएगा। पुल रेत से बंद हो जाने के चलते बरसाती पानी की निकासी नहीं होगी। ऐसे में किसानों की फसल के साथ-साथ उनके जान माल के नुकसान की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी।
4-5 फीट रास्ता ही बचा
किसानजोगिंद्र सिंह, रणजीत सिंह, दरबारा सिंह, गुरदेव सिंह, श्याम सि