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गुहला मेंं धान की फसल में लगी तेला नामक बीमारी से किसान परेशान
धानबाहुल्यहलका गुहला में धान की फसलों में तेला नामक बीमारी का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। जिस कारण यहां के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान सहन करना पड़ रहा है।
इस संबंध में किसान कश्मीर सिंह, हरमीत सिंह, कर्मजीत सिंह, चना, रमेश कुमार, बीरभान सिंह, धनपत, बजीर सिंह, सतपाल, राजेंद्र सिंह, लखविंद्र सिंह, पाला राम, जयभगवान, कर्मबीर बसिया राम ने बताया कि अबकी बार धान में काला भूरा तेला लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि उक्त बीमारी पर काबू पाने के लिए किसान महंगे भावों की कीटनाशक दवाइयों का स्प्रे भी करा चुके हैं, लेकिन फिर भी बीमारी का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। किसानों ने बताया कि उक्त बीमारी लगने से धान के निकाल में प्रति एकड़ पांच से दस क्विंटल का घाटा सहन करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि जो धान पकाई पर पहुंच चुकी है उनमें भी स्प्रे कराना पड़ रहा है, क्योंकि तेला बीमारी लगने से उक्त पकी-पकाई धान खराब हो जाती है। किसानों ने कहा कि तेला बीमारी लगने से धान का पौधा नीचे की तरफ से सूखना शुरू हो जाता है जो जल्द ही धान की पकी-पकाई बालियों को भी फूस बना देता है। किसानों को पहले पत्ता लपेट बीमारी से पीछा छुड़ाने के लिए महंगे भावों की दवाइयों का स्प्रे करवाना पड़ा था औैर अब तेला नामक बीमारी के प्रकोप सहन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को धान में बीमारियां लगने से दोहरी मार पड़ रही है एक तो महंगे भावों की दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं दूसरा मजदूरों को पैसे देकर स्प्रे करवाना पड़ता है। किसानों ने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी भी उन्हें गांव में जाकर धान में लगी बीमारियों से निपटने बारे कुछ सुझाव नहीं देते।
बीमारी का मुख्य कारण मौसम का बदलना : राम निवास
उपमंडलकृषि अधिकारी चीका डाॅक्टर राम निवास ने कहा कि फसल में भूरा काला तेला नामक बीमारी लगने का मुख्य कारण मौसम का बदलना है। जिन गांवों में किसानों की फसलों में बीमारी लगी हुई है वहां का दौरा करके जांच की जाएगी।