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भगवान श्रीराम ने शिव धनुष का चिल्ला चढ़ा सीता से रचाया विवाह
श्रीभवानीमंदिर चीका में आदर्श नाटक क्लब द्वारा आयोजित की जा रही राम लीला में सीता स्वयंवर का मंचन किया गया। राजा जनक द्वारा घोषणा की गई कि जो भी राजा या राजकुमार श्री शिव धनुष का चिल्ला चढ़ाएगा। वही उनकी बेटी सीता का पति कहलाएगा। सीता उसके गले में वरमाला डालेगी। वाणासुर तपस्या में लीन थे तो उनको मिथिलानरेश द्वारा की गई घोषणा का आभास हुआ और साथ ही यह भी आभास हुआ कि इस स्वयंवर में लंकेशपति रावण भी पहुंच रहा है और वह स्वयंवर में बाधा पहुंचा सकता है। ऐसा सोचकर वाणेश मिथिलानरेश के पास जाता है कुछ ही समय बाद लंकेशपति दशानन मिथिलापुरी में जाता है और राजा जनक को अपनी सुता को बुलाने के लिए कहता है। ऐसा सुनकर वाणेश रावण को समझाता है कि राजा जनक ने श्री शिव धनुष का चिल्ला चढ़ाने वाले से ही सीता का विवाह करने की घोषणा की है और आप इस गुरु धनुष का चिल्ला नहीं चढ़ा सकते क्योंकि यह हमारे गुरु का धनुष है। मैं आपको इसलिए यह समझा रहा हूं कि आप मेरे गुरु भाई हैं।
वेदों और शास्त्रों का ज्ञाता होने के कारण रावण को अपना भविष्य मालूम था कि सीता ही उनके मोक्ष प्राप्ति का साधन है। रावण द्वारा श्री राम का आह्वान करने पर श्री राम तुरंत रावण के पास आए। रावण ने उनसे पूछा कि आप ने मेरे पास आने का वादा किया था और कहा था कि मेरे बाण द्वारा ही तुम मोक्ष प्राप्त करोगे। ऐसा सुनकर श्री राम ने रावण से कहा कि मैंने जन कल्याण तुम्हें मोक्ष प्रदान करने के लिए ही अवतार लिया है। स्वयंवर में अनेक राजाओं राजकुमारों द्वारा अपनी ताकत दिखाई गई परन्तु कोई भी शिव धनुष का चिल्ला चढ़ा सका, ऐसा देखकर राजा जनक को बहुत दुख हुआ और उन्हें लगा की इस पृथ्वी पर अब कोई भी वीर नहीं है जो सीता से विवाह करने लायक हो। उन्होंने भरी सभा में सभी आए हुए मेहमानों को चले जाने के लिए कह दिया, ऐसा सुनकर लक्ष्मण को बड़ा क्रोध आया कि राजा जनक ने हम सब का अपमान कर दिया है। श्री राम के समझाने पर लक्ष्मण शांत हुए। श्री राम द्वारा धनुष का चिल्ला चढ़ाया गया और सीता ने श्री राम को वरमाला डाली। इस शुभ अवसर पर बहुत ही भव्य आतिशबाजियां चलाई गई, मंगल गान गाए गए श्री राम की बारात का स्वागत किया गया।