- Hindi News
- जीरी को लेकर किसानों पर भारी पड़ रहे हैं पंजाब के किसान
जीरी को लेकर किसानों पर भारी पड़ रहे हैं पंजाब के किसान
पंजाबकीसीमा के साथ सटी हुई जिला कैथल की सबसे महत्वपूर्ण अनाज मंडी चीका में जीरी की आवक को लेकर स्थानीय किसानों पर पंजाब के किसान भारी पड़ते दिखाई दे रहे हैं।
मंडी में लोकल किसान बारीक जीरी काफी कम मात्रा में ला रहे हैं जबकि दूसरी तरफ पंजाब सीमा के किसान भारी मात्रा में बारीक जीरी को लेकर मंडी में पहुंच रहे हैं। मंडी में फिलहाल जीरी की आवक कम दिखाई दे रही है। यदि पंजाब के किसान अपनी जीरी मंडी में लाते तो इस बार धान खरीदने के मामले में सरकारी आंकड़े को छूना मुश्किल हो जाता। अब तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार मंडी में केवल 20 हजार 485 क्विंटल धान की ही खरीद हो पाई है जबकि पिछले सीजन में अब तक 23 हजार 230 क्विंटल आवक हो चुकी थी।
धानखरीदी नहीं लिखवाई जाती है : धानखरीद का पुराना फार्मूला मंडी में पूरी तरह हावी है जिसके चलते यदि यूं कहा जाए कि मंडी में धान खरीदी नहीं जाति, अलबत्ता लिखवाई जाति है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
दरअसल नियम यह है कि किसान के सामने मार्केट कमेटी के अधिकारियों की मौजूदगी में धान की बोली हो। परंतु चल यह रहा है कि जैसे ही किसान मंडी में धान लेकर आता है तो उसकी ढेरी को प्राइवेट राइस मिलर के पास आढ़ती द्वारा बेच दिया जाता है और बाद में उसे मार्केट कमेटी के रिकार्ड में दर्ज करवा दिया जाता है। इस प्रक्रिया को जगाड़ू प्रक्रिया कहा जाता है जिसे सरकारी तौर पर कोई मान्यता नहीं मिली हुई है।
धानकी आवक खरीद में है भारी अंतर : चीकामंडी में धान की आवक खरीद में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। जानकारी के अनुसार इस समय मंडी में प्रतिदिन लगभग 15 हजार क्विंटल धान की आवक हो रही है, जबकि खरीद के अब तक पिछले दिनों के टोटल आंकड़े को भी यदि जोड़ लिया जाए तो सरकारी रिकार्ड में वह लगभग 20 हजार क्विंटल ही दर्शा रहा है, जिससे साफ है कि मंडी में पहुंचने वाली धान का एक बड़ा हिस्सा दो नंबर में मार्केट से बाहर जा रहा है।
धानके भाव में अस्थिरता का माहौल : 1509किस्म की बारीक धान के मूल्य में लगातार अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। धान खरीद के शुरूआती दिनों में 3400 रुपए प्रति क्विंटल में बिक चुके धान का मूल्य गिरकर अब 2300 रुपए प्रति क्विंटल तक गिर गया है जिससे किसानों में भारी मायूसी छाई हुई है। खरीददार इसका कारण धान की भारी आवक होना धान में जरूरत से ज्यादा सीलन होना