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चावलों में नमी की मात्रा घटाने परराइस मिलरों ने किया रोष प्रकट
केंद्रसरकारद्वारा चावलों की नमी की मात्रा 15 से 14 प्रतिशत करने से यहां के राइस मिलरों में भारी रोष है। राइस मिलर एसोसिएशन चीका के प्रधान हंसराज सिंगला, मंगत राम, शीशपाल, नरसी राम, प्रवीन कुमार, रमन कुमार, राजेश कुमार, नानू राम, नरेश कुमार मांगे राम आदि ने कहा कि राइस मिलर तो पहले से ही घाटे में चल रहे हैं और जो शैलर वाले सरकार की जीरी खरीदकर उसकी एवज में सरकार को चावल देते हैं, उसके बदले में सरकार द्वारा उन्हें केवल 15 पैसे प्रति क्विंटल के हिसाब से कुटाई दी जाती है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा प्रति क्विंटल जीरी के हिसाब से जो चावल शैलर वालों से लिया जाता है, वह चावल सरकार की मांग के अनुसार एक क्विंटल जीरी में से कम से कम 5 किलो चावल कम निकलता है, जिसके चलते राइस मिलरों को भारी नुकसान सहन करना पड़ता है और अब केंद्र सरकार द्वारा चावल की नमी में भी एक प्रतिशत की कमी करके राइस मिलरों के ऊपर दोहरी मार मारने का कार्य किया है। उन्होंने बताया कि जीरी का सीजन सर्दियों में आने की वजह से जीरी में नमी की मात्रा अधिक होती है।
कई बार तो ठंड की वजह से 20 से लेकर 25 प्रतिशत तक की नमी वाली जीरी को भी सरकार द्वारा खरीद लिया जाता है, जिससे सर्दियों में सुखाना नामुमकिन है और चावल में 14 प्रतिशत तक की नमी लाना असंभव है।
नमी में एक प्रतिशत बढ़ाने की मांग
राइसमिलरों ने मांग करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चावल की नमी में जो एक प्रतिशत की कमी की गई है उसे वापस लिया जाए, ताकि राइस मिलर अपना व्यापार ठीक ढंग से चला पाए। राइस मिलरों ने यह भी कहा कि दूसरी तरफ हरियाणा वेयर कॉरपोरेशन द्वारा भी होल्डिंग चार्ज को लेकर कड़ा रवैया अपनाया हुआ है। राइस मिलरों द्वारा बार-बार मांग करने के बावजूद भी होल्डिंग चार्ज को लेकर कोई नियम नहीं बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार कारपोरेशन की मनमानी चलती रही तो आने वाले दिनों में राइस मिलर भारी मुसीबत में जाएंगे।