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श्रीमद्भागवत कथा में ध्रुव चरित्र के बारे में बताया
पंचदेव मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा करते भरत मुनि।
भास्कर न्यूज | ऐलनाबाद
शहरके ढ़ाणी शेरां मार्ग पर स्थित पंचदेव मंदिर उदासीन आश्रम में श्रीमदभागवत कथा ज्ञान यज्ञ जारी है। आश्रम के संस्थापक विश्वमुनि महाराज की तृतीय पुण्यतिथि पर आयोजित इस यज्ञ में उनके शिष्य महंत भरतमुनि महाराज ने अपनी मधुर वाणी में कथामृत की वर्षा की। उन्होंने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि वास्तव में यह जीव ही उत्तानपाद है। गर्भ में जीव के पैर ऊपर और सिर नीचे रहता है। मन की दो वृत्तियां हैं-सुरुचि और सुनीति। जीव की रूचि संसार के भोगों में अधिक रहती है जो उसकी सुरुचि को दर्शाती है। नीति की ओर उसका झुकाव कम ही रहता है। सुनीति परम पद की ओर ले जाती है और सुरुचि पतन की ओर। उन्होंने कहा कि सुनीति को अंगीकार करके जीव अंचल पद को प्राप्त कर सकता है। जबकि सुरुचि को गले लगाने वाला जीव संसार के जन्म-मरण के चक्कर में ही पड़ा रहता है।