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सीधी-सपाट नहीं मानव जीवन की राह : भरतमुनि

7 वर्ष पहले
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शहरके ढाणी शेरां मार्ग पर स्थित पंचदेव मंदिर उदासीन आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ जारी है। आश्रम के संस्थापक विश्वमुनि महाराज की तृतीय पुण्यतिथि पर आयोजित इस यज्ञ में उनके शिष्य महंत भरतमुनि महाराज अपनी मधुर वाणी में कथा अमृत की वर्षा कर रहे हैं। सोमवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान श्री कृष्ण का जन्म महोत्सव धूमधाम से मनाया गया।

भरतमुनि महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि मानव जीवन की राह सीधी सपाट नहीं बल्कि यह राह कंटीली, पथरीली, रपटीली टेढ़ी-मेढ़ी है। इन राहों में से कैसे गुजरना, कैसे जीवन रथ को सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाना, कैसे सुख दु:ख में अविचलित बने रहना और कैसे विषय परिस्थितियों में उनसे पार जाना यह सब भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में सुख दु:ख आते-जाते रहते हैं। सुख आने पर मनुष्य इतराने लगता है और दु:ख आने पर मनुष्य घबराने लगता है। परंतु गीता में समझाया गया है कि दोनों के आने पर कैसी सोच रखकर जीवन पथ पर चलना चाहिए। गीता के छठे अध्याय के ५६वें श्लोक में कहा गया है कि दु:खेष्वनु द्विग्नमना: सुखेषु विगतस्पृह:। अर्थात दु:ख आने पर उद्विग्न नहीं होना चाहिए। वहीं सुख आने पर नि:स्पृह रहना अर्थात इठलाना और फूलना नहीं। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण के जीवन में शैशवावस्था से लेकर स्वधामगमन तक कैसी-कैसी परिस्थितियां आयी और कैसे कैसे संकट आये, परंतु वे सदैव अविचलित रहे।

ऐलनाबाद। पंचदेव मंदिर उदासीन आश्रम में श्रीमद्भागवत श्रवण करते श्रद्धालु।

ऐलनाबाद। पंचदेव मंदिर उदासीन आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते मंहत भरतमुनि महाराज।