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ज्ञान केवल िकताबों में नहीं, संपूर्ण सृष्टि और प्रकृित बृहत पुस्तकालय है : मुनि

7 वर्ष पहले
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यज्ञ करने से शुद्ध होता है वातावरण

ढाणीशेरां मार्ग स्थित पंचदेव मंदिर उदासीन आश्रम में भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में रुकमणि विवाह का वृतांत सुनाया गया। आश्रम संस्थापक विश्वमुनि की तृतीय पुण्यतिथि पर आयोजित यज्ञ में उनके शिष्य महंत भरतमुनि ने कथा सुनाई। उन्होंने रुकमणि विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि लक्ष्मी सिर्फ नारायण की है और नारायण की ही रहेंगी। जो लक्ष्मी का पति बनने की चेष्टा करते हैं उन्हें शिशुपाल की तरह रोना पड़ता है। इंसान लक्ष्मी का पुत्र बन सकता है और लक्ष्मी को पुत्री भी बना सकता है।

वस्तुत: लक्ष्मी जगन्माता है तो नारायण लक्ष्मीपति। उन्होंने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि ईश्वर कृपा बिना किसी व्यक्ति को धन-संपत्ति, प्रतिष्ठा और ऐश्वर्य नहीं मिल सकता। केवल प्रय| और पुरुषार्थ से संपदा अर्जित नहीं की जा सकती। इसमें परमात्मा की कृपा का सहारा भी लगता है। अत: वैभव सम्पन्न व्यक्तियों को अपने वैभव पर अहंकार नहीं करना चाहिये। उन्हें परमात्मा के अनुग्रह का ख्याल रखना चाहिये। उन्होंने दत्तात्रेय चरित्र के बारे में कहा कि परमात्मा की सुंदर सृष्टि यह उत्कृष्ट कृति एक बहुत बड़ा शिक्षालय है। इसमें जीवन की हर प्रकार की संपूर्ण शिक्षा के स्त्रोत मौजूद है। इस वृहद शिक्षालय से मनुष्य जीवन की हर प्रकार की शिक्षा प्राप्त कर सकता है। ज्ञान केवल पुस्तकों में नहीं है। ज्ञान का बृहत पुस्तकालय तो यह सृष्टि और प्रकृति है।

सिरसा। ढाणी शेरां मार्ग स्थित पंचदेव मंदिर उदासीन आश्रम में भागवत कथा सुनतीं महिलाएं।

भास्कर न्यूज | कालांवाली

गीताभवन में श्रीमद्भागवत कथा का गुरुवार को पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। श्रीश्री 1008 महामण्डलेश्ववर स्वामी सुरेश मुनि की अध्यक्षता में हवन हुआ। इसके बाद भंडारे में प्रसाद बांटा गया। उन्होनें कहा कि श्रीमद्भागवत् कथा मनुष्य जीव के पापों को दूर करती है और उसके मन को शांति देती है। श्रीमद्भागवत् कथा हर मनुष्य की मनोकामनाओं को पूर्ण करती है। श्रीमद्भागवत् कथा से पापी मनुष्य के पापों का भी नाश करके उसको मुक्ति प्रदान करती हैै। उन्होने कहा कि यज्ञ अनुष्ठान का होना जरूरी है। यज्ञ करने से वातावरण का शुद्विकरण होता है मानव जाति में कार्य ऊर्जा का विकास होता है। हमारी धर्म संस्कृ ति में गाय का विशेष महत्व है। इसलिए हर व्यक्ति को गाय की सेवा क