रासायनिक की बजाय जैविक खादों का इस्तेमाल करें किसान
गांवकिरढ़ान में कृषि विज्ञान केंद्र फतेहाबाद की ओर से प्रगतिशील किसान सतपाल गोदारा के खेत पर राया खेत दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के कोर्स संयोजक डाॅ. सत्यजीत यादव ने बताया कि इस वर्ष जिले में सरसों की बिजाई 14600 हैक्टेयर क्षेत्रफल में की गई है जोकि पिछले वर्ष के मुकाबले अधिक है। केन्द्र द्वारा सरसों की नवीनतम किस्म आरएस-0749 के प्रदर्शन प्लाट लगाए गए जिनका किसान द्वारा लगाई गई अन्य किस्मों की तुलना में उत्पादन क्षमता पर प्रभाव देखा जाएगा। यादव ने बताया कि तिलहन उत्पादन को बढ़ाने में उन्नत किस्मों के बीज, सिंचाई प्रबंधन, पौध संरक्षण के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों का सराहनीय योगदान तो है लेकिन वर्तमान में रसायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से इनकी मांग आपूर्ति में काफी अंतर गया है जिसके परिणामस्वरूप भूमि की उपजाऊ क्षमता संरचना पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। डाॅ. संदीप आर्य ने कृषि वानिकी बागवानी बारे विस्तृत जानकारी दी। डाॅ. राकेश कुमार ने सरसों की फसल की मुख्य बीमारियों जैसे तना गलन सफेद रतुआ तथा गेहूं में पीला रतुआ समस्या के समाधान बारे विस्तारपूर्वक बताया। डाॅ. गुरनाम सिंह ने खेती के साथ सहायक धंधे अपनाने कृषि विपणन बारे किसानों को जागरूक किया। डाॅ. सरदूल मान ने सूत्र कृमि प्रबंधन फसल विविधिकरण अपनाने की अपील की। इस अवसर पर प्रथम पंक्ति प्रदर्शन प्लाट का भ्रमण अवलोकन भी किया गया।
फतेहाबाद। गांव किरढ़ान में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आयोजित राया खेत दिवस कार्यक्रम के दौरान किसानों को जानकारी देते हुए विशेषज्ञ।