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दावत में बकरा काटने पर बिश्नोई समाज का हंगामा
अपनेघर में पोता होने की खुशी में गांव झलनिया में बावरिया समाज के जसवंत सिंह ने दावत में बकरा काटा तो गांव में बिश्नोई समाज ने हंगामा कर दिया। बावरिया समाज बिश्नोई समाज के लोगों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि नौबत मारपीट तक पहुंच गई। हालांकि बाद में बिश्नोई समाज की ओर से तर्क दिया गया है कि नील गाय काटने की बात सामने आने पर विवाद हुआ लेकिन दूसरी ओर बावरिया समाज की उक्त गतिविधि को लेकर पंचायत बुलाई गई और पंचायत में बावरिया समाज पर 5100 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि दोबारा से यदि गांव में बावरिया समाज ऐसा करेगा तो उसे गांव से निकाल दिया जाएगा। इस फरमान से नाराज बावरिया समाज के लोग मंगलवार को डीसी राजीव रतन से मिलने पहुंचे। डीसी ने मामला एडीसी के पास भेजा जिस पर एडीसी ने दोनों पक्षों से बातचीत कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। गांव झलनियां निवासी जसवंत सिंह उसके साथ आए समाज के सुखदेव सिंह, रविदास, गुरबचन सिंह, मंगल, नरेश, सत्यनारायण आदि लोगों ने बताया कि बावरिया समाज अपने पूर्वजों के रीति-रिवाज के अनुसार अपने धर्म का पालन करता रहा है। इसी के तहत खुशी के मौके पर समाज के लोगों ने बकरा काटा था। आरोप है कि बिश्नोई समाज के लोगों ने उनके घर आकर गलत आरोप लगाते हुए कहा कि नील गाय काटी गई है।
मौके पर जीव रक्षा विभाग के अधिकारियों को बुलाकर आरोपों की जांच करवाई गई तो बिश्नोई समाज के आरोप गलत पाए गए। बावरिया समाज के उक्त लोगों ने बताया कि गांव में इस मामले को लेकर पंचायत बुलाई गई जिसमें उनके धर्म नियमों की परवाह किए गए बगैर आदेश पारित किया गया जो कि सरासर गलत है। बावरिया समाज के लोगों ने डीसी से मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए पंचायती फैसले पर रोक लगाने की मांग की है।
पूरे गांव की सहमति से लिया गया फैसला : सरपंच
^बावरिया समाज द्वारा बकरा काटने पर बिश्नोई समाज ने एतराज जताया था। इसके बाद गांव में पंचायत में फैसला हुआ है कि कोई भी समाज या व्यक्ति गांव में जीव हत्या नहीं करेगा। इसके तहत पूरे गांव की जिम्मेदारी है कि जीवों की रक्षा की जाए। प्रशासन से बावरिया समाज अनुमति लेकर छूट ले सकता है तो अलग बात है। लेकिन किसी विशेष समाज के लिए आदेश ना होकर पंचायत का आदेश पूरे गांव के लोगों के लिए है।\\\'\\\'
संतलालओड, सरपंच,झलनियां।
डीसी साहब गांव से निक