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डिग्री अनिवार्य करने पर किया प्रदर्शन खाद और कीटनाशकों की दुकानें बंद

5 वर्ष पहले
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कीटनाशकएवं उर्वरक विक्रेताओं के लिए विज्ञान स्नातक की योग्यता अनिवार्य करने के खिलाफ सैकड़ों कीटनाशक विक्रेताओं ने हड़ताल रखी। दुकानदारों ने काले बिल्ले लगाकर रोष जताया। पेस्टिसाइड विक्रेता मंगलवार को श्रीराम सेवा समिति धर्मशाला में एकत्र होने के बाद जीटी राेड पर प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। जहां एसडीएम संत लाल पचार को ज्ञापन दिया। दि सीड्स पेस्टीसाइड एंड फर्टिलाइजर्स डीलर एसोसिएशन जिला प्रधान यशपाल जिंदल के नेतृत्व में दुकानदारों ने शहर में प्रदर्शन किया।

जिला प्रधान जिंदल ने दुकानदारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज देशभर में केंद्र सरकार की 5 नवंबर 2015 की कीटनाशक संबंधित अधिसूचना एवं 10 अक्टूबर 2015 की उर्वरक संबंधित अधिसूचना के खिलाफ कीटनाशक विक्रेता लामबंद हैं। उन्होंने कहा कि नए नियमों के अनुसार कीटनाशक उर्वरक के पुराने विक्रेता लाइसेंस की जटिल अनिवार्यता को पूरा नहीं कर सकते। नियम के अनुसार पुराने कार्यरत लाइसेंस धारकों को अधिसूचना जारी होने के दो वर्ष के अंदर विज्ञान स्नातक की योग्यता प्राप्त करना अनिवार्य कर दी गई है। जबकि अधिकांश व्यवसायी 4 वर्ष के नियमित पाठ्यक्रम की पढ़ाई कर पाने की स्थिति में नहीं है।

प्रदर्शनकारियोंका पुलिस ने धारा 144 बता रोका

पेस्टीसाइडविक्रेता प्रदर्शन करने के बाद जब लघु सचिवालय के मुख्य गेट पर पहुंचे तो पुलिसकर्मियों ने गेट को बंद कर प्रदर्शनकारियों को अंदरजाने से रोका। पुलिसकर्मियों ने धारा 144 लागू होने का हवाला देते हुए कई देर तक उन्हें रोके रखा।

प्रदर्शन में मंडल प्रधान नरेश टीटू तनेजा, भूना प्रधान अजय मेहता, रतिया प्रधान उपदेश, नरेंद्र वधवा, जाखल से ओमप्रकाश, टोहाना से नरेश, हरिओम, हरी सिंह मेहरिया, सतपाल अरोड़ा, केवल अरोड़ा, सुरेंद्र मित्तल, मंगत मित्तल, किरोड़ीमल गर्ग, लड्डू राम ग्रोवर, भट्टू भूना से सैकड़ों व्यापारी मौजूद थे।

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पुराने दुकानदारों को दो साल का समय उक्त नियम नए लाइसेंस लेने वालों के लिए होगा। वर्तमान में जो लोग पेस्टीसाइड बनाने या बेचने का काम कर रहे हैं, उन्हें विभाग की ओर से दो साल तक की छूट दी है। उन्हें निर्देश दिए जा रहे हैं कि इस अवधि में या तो वह डिग्री का प्रबंध कर लें अन्यथा दो साल बाद उनके लाइसेंस को रिन्यू नहीं किया जाएगा, रद्द कर दिया जाएगा। यह छूट 5 नवंबर 2017 तक लागू रहेगी। बिना डिग्री वाले दुकानदारों को मुश्किलें हो सकती हैं।

एग्रीकल्चर एंड फार्मर वेलफेयर मंत्रालय की ओर से पेस्टिसाइड निर्माताओं विक्रेताओं को लाइसेंस देने के लिए पढ़ाई होने संबंधी अधिसूचना जारी की है। इसके तहत अब विक्रेताओं निर्माताओं को कृषि विषयों संबंधित कोई कोई डिग्री अवश्य लेनी होगी। अधिसूचना के मुताबिक इसके लिए एग्रीकल्चर साइंस, बायोकेमिस्ट्री, लाइफ साइंस, केमेस्ट्री विद साइंस, बॉटनी, जियोलॉजी में एक डिग्री अनिवार्य कर दी गई है। इसी प्रकार पेस्टीसाइड का निर्माण करने वालों के पास एमएससी केमिस्ट्री विद डाक्टरेट, ग्रेजुएट विद केमिकल इंजीनियरिंग आदि की डिग्री अनिवार्य होगी।

प्रदर्शन कर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने जाते पेस्टीसाइड एसोसिएशन के सदस्य।

प्रदेश में 4 लाख परिवार होंगे प्रभावित

यशपालजिंदल ने कहा कि हरियाणा राज्य में ही डेढ़ लाख व्यवसायी हैं और उनके 4 लाख परिवार इस व्यापार पर निर्भर करते हैं। इस निर्णय से इतने बड़े समुदाय का अहित होगा, जो हमें स्वीकार नहीं है। मेडिकल क्षेत्र में भी तकनीकी शिक्षा लागू करते समय पुराने व्यवसायियों को नियमित किया गया था। यदि नियम लागू करना ही है तो पहले कंपनियों में विज्ञान स्नातकों की नियुक्ति की जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने यह अधिसूचना वापस ली तो प्रदेशभर में व्यापारी प्रदर्शन करेंगे और आंदोलन छेड़ेंगे।

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