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किसानों को सूत्रकृमि प्रबंधन के गुर बताए
उपमंडलकृषि अधिकारी कार्यालय में शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से कपास और धान में समन्वित सूत्रकृमि प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण कैंप लगाया गया।
कैंप में सूत्रकृमि विशेषज्ञ डाॅ.सरदूल मान ने कपास और धान में लगने वाले जड़-गांठ सूत्रकृमि के लक्षण, पहचान और प्रबंधन पर प्रस्तुतिकरण के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी। डाॅ. मान ने बताया कि धान में सूत्रकृमि हुकनुमा गांठें बना देता है और पौधों में फुटाव कम और पीलापन जाता है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। ऐसी समस्या अक्सर रेतीली जमीनों में पाई जाती है। इसलिए ऐसी जमीनों में धान की बजाय कपास, ग्वार और बाजरा की खेती करनी चाहिए।
कपास में जड़-गांठ सूत्रकृमि की समस्या भट्टू ब्लाक में देखने को मिलती है। कपास की जड़ों में गांठें बन जाती हैं। फुटाव कम और पीलापन जाता है।
इसके निजात के लिए किसानों को चाहिए कि गर्मियों में खेती की गहरी जुताई करें और कपास की बिजाई से पहले बायोटिका जीडी 35-45 से उपचारित करके ही बिजाई करें। इस अवसर पर उपमंडल अधिकारी डाॅ.राजेश सिहाग, सहायक पौध संरक्षण अधिकारी डाॅ. मुकेश मेहला, डाॅ. विजेंद्र चौहान सहित 30 अधिकारियों ने भाग लिया।
कम लागत से अधिक उत्पादन लें
अर्थशास्त्रवैज्ञानिक डाॅ.गुरनाम सिंह ने बताया कि कम लागत में अधिक उत्पादन कैसे लें और अपने उत्पाद को दो से तीन भागों में बाजार में उचित भावों पर बेचें। वैज्ञानिक डाॅ.सत्यजीत ने आने वाली रबी फसलों खासकर तिलहनी फसलों की कृषि क्रियाओं पर प्रकाश डाला।