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संस्थाओं ने दिए सुझाव -योजना बनाकर ही दिया जा सकता है पशुओं को आसरा

5 वर्ष पहले
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परेशानीका सबब बन चुके बेसहारा पशुओं से निजात दिलाने को लेकर जहां जिला प्रशासन अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अब संस्थाएं आने लगी हैं। इस समस्या के समाधान को लेकर दो समाजसेवी संस्थाओं ने सरकार प्रशासन को सुझाव दिए हैं। इन सुझावों को बताते हुए कुछ बदलाव करने की मांग की गई है।

इन संस्थाओं का दावा है कि यदि सरकार और प्रशासन इन सुझावों को मानते हुए संस्थाओं का सहयोग ले तो काफी हद तक पशुओं से निजात पाई जा सकती है। सड़कों पर इनकी तादाद कम हो सकती है। वहीं जो पशु नंदीशाला गोशालाओं में होंगे, उन्हें भोजन-चारा आसानी से पहुंचाया जा सकता है। इसमें प्रशासन को केवल सरकारी ग्रांट पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। लोगों के सहयोग से ही यह काम किया जा सकेगा। पीएफए संस्था ने विदेश नस्ल के पशुओं की तादाद कम करने को लेकर उपाय बताए हैं तो जिंदगी संस्था गोवंश की देखभाल भोजन के प्रबंध बारे सुझाव दिए हैं।

पीपुल फॉर एनिमल (पीएफए)संस्था की ओर से हरियाणा सरकार को एक पत्र लिख कर प्रदेश में विदेशी नस्लों की गायों पर कृत्रिम गर्भाधान पर पाबंदी लगाने की मांग की गई है। पत्र में लिखा है कि हरियाणा सरकार की ओर से हाल ही हरियाणा गो संवर्धन एवं संरक्षण कानून 2015 लागू किया गया है, जिसके सेक्शन अनुसार देशी भारतीय नस्ल को बढ़ावा देना है।

वहीं हरियाणा सरकार के ही अधीन पशु पालन विभाग की ओर से विदेशी अमेरिकन, जर्सी नस्ल का कृत्रिम गर्भाधान किया जाता है। अच्छी मात्रा में दूध देने वाली भारतीय नस्लों जैसे कि साहीवाल, गिर, राठी, हरियाणा नस्ल के कृत्रिम गर्भाधान के सीमन की विभाग में कमी रहती है। सुझाव देते हुए मांग की गई है कि नए कानून के तहत हरियाणा में विदेशी नस्ल के कृत्रिम गर्भाधान पर पूर्णतया पाबंदी लगा देनी चाहिए। चूंकि विदेशी नस्ल की गायों के कारण देसी नस्ल की गायों की दुर्गति हो रही है।

विदेशी गायों की नस्ल पर बीमे का प्रावधान भी है, यदि इसे बंद कर दिया जाए तो लोग विदेशी गायों पर ध्यान देना कम कर देंगे। इससे अपने आप ही विदेशी नस्ल गायों सांडों की संख्या कम हो जाएगी। विदेशी नस्ल के आवारा अमेरिकन सांडों की बढ़ती संख्या के कारण लोग परेशान है। बिना सामाजिक सहयोग के देसी गोवंश का संरक्षण नहीं हो सकता।

सरकार को गंभीरता से काम करना होगा: कड़वासरा

^पशुओंकी समस्या काफी गंभीर है। इसे लेकर संस्थाओं सरकार को गंभीरता से काम करना होगा। कुछ ऐसी विषय हैं, जिन पर चर्चा कर अंकुश लगाने की जरूरत है। केवल कानून बनाने भर से गौ वंश का संरक्षण नहीं हुआ। बाकी नस्लों के पशुओं पर कंट्रोल करना होगा तब जाकर इस समस्या का हल निकलेगा।\\\'\\\' विनोदकड़वासरा, जिला प्रधान, पीएफए।

{आवारा पशुओं का बधियाकरण अभियान अब तक कागजी स्तर पर अधिक चल रहा है, उसमें तेजी लाते हुए अभियान जल्द पूरा हो।

{सरकारी स्तर पर बनाई जा रही नंदीशाला में पक्का शैड आदि बनने तक अस्थाई शेड का प्रबंध करके उसमें नंदी भेजे जाएं। इसमें विभिन्न संगठनों व्यापारियों का सहयोग लिया जाए।

{पशु मेले की आड़ में कोई भी आवारा पशु शहर में छोड़ पाए उसके लिए निगरानी कमेटी बनें। गायों को गोशाला प्रबंधन कमेटी टैग लगाएं जाएं।

{नंदीशाला में रखे जाने वाले पशुओं के भरण-पोषण के लिए अनाज मंडी मार्केट कमेटी के जरिये तूड़ा, फसल कचरा सब्जी मंडी से हरे कचरे, वेस्ट सब्जी एवं फ्रूट आदि को प्रतिदिन नंदीशाला में भिजवाना सुनिश्चित हो।

{शहर के प्रत्येक घर-दुकान से नंदीशाला में रखे जाने वाले पशुओं के लिए रोटी अथवा अन्य खाद्य पदार्थ एकत्रित करना सुनिश्चित किया जाए, जिसमें नगर परिषद की कचरा रेहड़ियों का प्रयोग खाली समय में किया जा सकता है।

{शहर में लगने वाली हर सब्जी रेहड़ी संचालक को कचरा एकत्रित कर उसे नंदीशाला में पहुंचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रबंध किए जाएं

{नंदी पकड़ने में विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों का सहयोग लिया जाए।

{नंदीशाला संचालन में आर्थिक व्यवस्था बनाए रखने हेतु प्रत्येक दुकान से 60 रुपये और प्रति घर से 30 रुपये मासिक का सहयोग लिया जा सकता है।

{बुनियादी आदि के माध्यम से एक विशेष जागृति लोगों में फैलाई जाए कि वे घर में वेस्ट होने वाली खाद्य सामग्री नंदीशाला में पहुंचाएं ताकि शहर अवारापशु मुक्त हो सके।

{गोशालाएं सरकारी ग्रांट से चलती है, जिला प्रशासन ऐसी गोशालाओं को ही सरकारी अनुदान अथवा ग्रांट देने का नियम बनाए जो अपनी गांव अथवा शहर की गोशाला में अलग से नंदी बाड़ा बनाकर रखने का प्रबंध करे।

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