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‘धर्म प्रचार को मनोरंजन बनाया’

5 वर्ष पहले
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डॉ. स्वामी दिव्यानंद ने गीता अमृत महोत्सव का शुभारंभ किया

प्रवचन

विदेशी विकृत सभ्यता-संस्कृति का प्रभाव कहें या फिर संस्कृत भाषा का अभाव किंतु यह सत्य है कि इन्हीं कारणों से हम अपने मूल दार्शनिक ग्रन्थों का पठन पाठन नहीं कर सके। हमारे त्रिकालदर्शी ऋषियों का धर्म और जीवन के प्रति क्या दृष्टिकोण था इस बात का ज्ञान आम साधारण की तो क्या कहें हमारे अच्छे भले धर्म प्रचारकों को भी नहीं है आज तो केवल मनोरंजन ही बनकर रह गया है यह धर्म मार्ग।

शनिवार को यह बात गीता व्यास डॉ. स्वामी दिव्यानंद ने मॉडल टाउन स्थित श्री गीता भवन में आयोजित नौ दिवसीय श्री दिव्य गीता अमृत महोत्सव का शुभारंभ करते हुए कही। उन्होंने कहा कि भगवद् गीता जैसा श्रेष्ठतम् ग्रंथ जो केवल कथा वाचने वाली वाणी नहीं थी अपितु अर्जुन जैसे महारथी और वह भी रणभूमि में जब अर्जुन क्या करूं और क्या करूं के सागर में गोते खाने लगेω जिस क्षुद्र सोच ने अर्जुन को अपने कर्त्तव्य से विरक्त कर डाला किंतु गीता उपदेश सुनकर वह पुन: जागृत हो गया मानो उसकी गंदी मानसिकता का इलाज हो गया होω किंतु आज ऐसे विलक्षण ग्रंथ का पाठन भी बस पुण्य कमाने तक रह गया है। इसी उपलक्ष्य में पादुका पूजन एवं श्री गीता महायज्ञ हुआ। दौरान महाप्रभु श्री तपोवन विहारी महाराज की पालकी यात्रा भी निकाली गई। मुख्य यजमान के रूप में राजीव बत्तरा, जितेंद्र मदान, सुरेश पूनियां, पवन नागपाल, नरेश सरदाना, लक्ष्मी चंद सरदाना, गुरदयाल कथूरिया, विजय विश्नोई, योगेश मेहता, वेद बत्तरा, राघव बत्तरा, सुशील बंसल, सुनील चौधरी प्रमुख रहे। कार्यक्रम के दूसरे दिन रविवार को मंदिर में स्वास्थ्य जांच शिविर लगेगा।

फतेहाबाद। गीता मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्री दिव्य गीता अमृत महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर पूजा अर्चना करते स्वामी दिव्यानंद जी महाराज श्रद्धालु।

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