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एकीकरण के लिए हिंदी भाषा ही जरूरी माध्यम

7 वर्ष पहले
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टोहाना | हरियाणाप्रादेशिक हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। किसान विश्राम गृह पर मा. विनोद सिल्ला की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन का शुभारंभ मुख्यअतिथि साहित्यकार त्रिदेव दुग्गल मुहालिया ने किया। मंच संचालन शिक्षाविद सुनील शास्त्री ने किया तथा संगठन सचिव कुलदीप स्वतंत्र ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की।

मुख्यअतिथि त्रिदेव दुग्गल ने दिल में हिन्दी और हिन्दुस्तान रखता हूं- किसी का दिल ना दुखे ध्यान रखता हूं सुनाकर शुभारंभ किया। बलवंत सिंह मान, प्रवीण कुमार, कुलदीप स्वतंत्र, अमन जाट, नरेश खोखर, हास्य कवि ओमप्रकाश लांग्यान,विनोद सिल्ला, लक्की बलराज, सूफी गायक हकीकी हंस, भगवान दास, अनमोल सिल्ला, लाक्ष्या रानी, यदु कुमार, यश, वंश मंडल ने कविताएं सुनाई। पवन सोनी ने हरिवंश राय बच्चन की रचना कुलदीप पेंटर ने प्रकृति पर कविता प्रस्तुत की।

किसान विश्राम गृह में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में कवियों को सम्मानित करते रामकुमार मंडल अन्य।

भास्कर न्यूज | फतेहाबाद

राष्ट्रके एकीकरण के लिए हिंदी भाषा ही जरूरी माध्यम है। लेकिन हिंदी भाषा को कुछ अपनों ने ही उपेक्षित किया है। जबकि हकीकत यह है कि हिंदी ने अपनी सरलता और प्रभाव से विश्वभर में अपना परचम लहराया है। भारत को जानने के लिए विदेशी लाेग भी हिंदी भाषा सीखने लगे हैं। विश्व के 154 देशों के विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई और सिखाई जा रही है।

यह बात साहित्यकार एवं शिक्षाविद डाॅ. ओमप्रकाश कादयान ने कही। वे रविवार को हिंदी दिवस के मौके पर पपीहा पार्क में कला साहित्य मंच की ओर से आयोजित हिंदी भाषा संगोष्ठी और कवि गोष्ठी समारोह को बतौर मुख्यअतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी जुबान और हृदय की भाषा है। हमारे देश का साहित्यिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास भी इसी भाषा में ही संभव है। हमें बिना कोई संकोच किए हिंदी में काम करने और हिंदी में बोलने की मानसिकता बनानी होगी। हिंदी बोलने पर गर्व महसूस करना होगा। संस्था के अध्यक्ष डाॅ. सुदामा शास्त्री ने कहा कि बेशक अन्य सभी भाषाओं को सीखो लेकिन हिंदी भाषा का सम्मान सर्वोपरि करो।

समारोह के दूसरे चरण में कवि गोष्ठी हुई जिसमें हिसार, सिरसा और फतेहाबाद के कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला। कवि