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5 करोड़ के धान घोटाले में दो राइस मिलों के मालिकों पर केस
भास्कर न्यूज | फतेहाबाद/रतिया
करोड़ोंरुपये के धान घोटाले के मामले में दो राइस मिलों के खिलाफ गबन के आरोप में मामले दर्ज किए गए हैं। खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की शिकायतों पर रतिया सदर फतेहाबाद थाने में दो केस दर्ज हुए हैं और इन दोनों मामलो में करीब 5 करोड़ रुपये का घोटाले का आरोप लगाया गया है। रतिया में दर्ज हुए मामले के अनुसार गांव कलोठा के गर्ग राइस मिल मालिक पर दर्ज हुई एफआईआर में आरोप लगे हैं कि वर्ष 2013 में मिल को 469 मिट्रिक टन धान दिया गया था लेकिन शैलर मालिक ने तय समय पर तो विभाग को चावल दिया और ही धान लौटाया।
विभाग ने कई बार शैलर मालिक को सीएमआर मिलिंग के लिये दिया गया धान वापस जमा करवाने के लिए कहा लेकिन शैलर मालिक ने कोई जवाब नहीं दिया।
शैलरमािलक पर गबन का आरोप लगाया
विभागका कहना है कि शैलर मालिक ने सरकारी चावल का गबन कर लिया। ये चावल राशन डिपू अन्य जगहों पर वितरण के लिए भेजा जाना था। वहीं सदर फतेहाबाद थाने में दर्ज हुई एफआईआर में विभाग की ओर से दर्ज करवाई गई शिकायत में अयाल्की की ताराचंद राइस मिल की संचालक रिंकू रानी प|ी राजीव कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
3करोड़ 97 लाख रुपये का घोटाला
शिकायतमें आरोप करीब 10 हजार 800 क्विंटल धान जिसकी कीमत करीब 3 करोड़ 97 लाख रुपये है के घोटाले का आरोप लगाया गया है। विभागीय अधिकारी के अनुसार कई बार नोटिसों के बावजूद ना धान लौटाया गया है और ना ही धान की कीमत। इसलिए अब मुख्यालय के आदेशानुसार उक्त दोनों राइस मिलों के संचालकों पर केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई है।
इस लिए दिया जाता है धान
खाद्यआपूर्ति विभाग अनाज में किसानों से धान की खरीद कर धान को शैलर मालिकों को चावल निकालने के लिए दिया जाता है जिसे सीएमआर मिलिंग कहते। विभाग शैलर मालिकों से धान से निकाल गये चावल को वापस ले लेता है। सरकार की और से एक किंवटल धान से चावल निकालकर तैयार करने के बदले शैलर मालिक को 15 रुपये प्रति किंवटल मिलिंग के रूप में देती है। एक किंवटल धान से 67 किलो चावल वापस लिये जाते है जिसे कटौती कहते है। निर्धारित समय पर चावल लौटाने पर जुर्माना लगा दिया जाता है।