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आजादी से पहले की है एक्सरे मशीन, फतेहाबाद करना पड़ता है रेफर

7 वर्ष पहले
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सरकारने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सामान्य अस्पताल का दर्जा भले ही दे दिया हो लेकिन अस्पताल में लगी एक्सरे मशीन को अब तक नहीं बदला गया है। मोटे शरीर वाले लोगों के एक्स-रे इस मशीन से मशीन से नहीं हो पाते। रेडियोग्राफर को एक्स-रे करवाने वाले व्यक्ति को फतेहाबाद रेफर करना पड़ता है और वहीं उसे यह सुविधा मिल पाती है।

एक्सरेप्लेट पर मोटा शरीर नहीं आता पूरा

लोगोंकी बढ़ रही परेशानियों से अस्तपताल प्रशासन वाकिफ है लेकिन फिर भी मशीन को नहीं बदला जा रहा। अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आजादी के समय की एक्सरे मशीन लगी हुई है। देशभर में ये मशीनें बंद हो चुकी हैं। इस मशीन की एक्सरे करने की पॉवर की क्षमता एक सैकंड में 50 मिली एम्पियर तक क्षमता है जबकि आजकल आने वाली मशीनों की क्षमता 500 एम्पियर तक की है। फतेहाबाद में भी लगी मशीन 500 एम्पियर की है। जब भी सरकारी अस्पताल में किसी मोटे व्यक्ति का एक्सरे करने की नौबत आती है तो उस व्यक्ति का शरीर तो प्लेट पर पूरा आता है और ना ही मशीन काम करती है। मशीन लाल सिग्नल दे देती है।

बाद में उस व्यक्ति को फतेहाबाद रेफर करना पड़ता है। मंगलवार को भी एक महिला दो लोगों को फतेहाबाद रेफर किया गया। इन लोगों ने पीठ का एक्सरे करवाना था लेकिन शरीर मोटा होने के कारण मशीन जवाब दे गई और बाद में उन्हें फतेहाबाद रेफर करना पड़ा। रेडियोग्राफर महेंद्र सिंह ने बताया कि इस मशीन की पॉवर क्षमता 50 मिली एम्पियर की है, जबकि आजकल मशीनें 500 एम्पियर क्षमता की रही हैं। मोटे आदमी को एक्सरे के लिए फतेहाबाद रेफर करना पड़ता है। एसएमओ वीके जैन ने कहा कि नई एक्स-रे मशीन के का प्रस्ताव भेजा चुका है।