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3 माह की गर्भवती का पंजीकरण जरूरी

6 वर्ष पहले
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महिलाओं को अब गर्भ धारण का तीसरा महीना पूरा होते ही अपना पंजीकरण नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र या स्वास्थ्य केंद्र पर करवाना होगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संबंध में एएनएम और आशा वर्करों की जिम्मेदारी तय करते हुए उन्हें अपने इलाके में गर्भवती महिलाओं पर निगरानी रखने के लिए कहा गया है। तीन महीने बाद देरी से स्वास्थ्य विभाग की नजर में आने वाली महिलाओं और उनके परिजनों को पंजीकरण ना करवाने या देरी से पंजीकरण करवाने पर ठोस वजह पूछी जाएगी। कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ शुरू किए गए इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग ने हर तरह की रणनीति बनाकर इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने की कोशिश में जुटा है। विभाग की ओर से बनाई गई रणनीति के तहत यदि किसी महिला का किन्हीं कारणों के चलते गर्भ गिरता है या गिराने की नौबत आती है तो संबंधित डॉक्टर और महिला के परिवार से स्वास्थ्य विभाग गहनता से पूछताछ कर उनकी भी रिपोर्ट तैयार करेगा।

इसी दौरान होती है लिंग परीक्षण की कोशिश

स्वास्थ्यविभाग के अधिकारियों के अनुसार गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग परीक्षण तीन महीने के बाद ही संभव हो पाता है। ऐसे में लिंग परीक्षण करवाने वालों पर नजर रखी जाने की कोशिश होगी और इसके लिए आशा वर्कर और एएनएम अपने इलाके में समय-समय पर राउंड लगाकर गर्भवती महिलाओं पर निगरानी रखेंगी। ऐसे परिवाराें पर अधिक ध्यान रखने के लिए आदेश जारी किए गए हैं जिन परिवारों में पहली संतान लड़की है।

आशा वर्कर और एएनएम होंगी जिम्मेदार : सिविल सर्जन

^विभागकी ओर से आशा वर्कर और एएनएम की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। अगर लिंग परीक्षण का कोई मामला सामने आता है तो संबंधित महिला के इलाके की आशा वर्कर या एएनएम पर से जवाब मांगा जाएगा। आशा वर्कर और एएनएम अपने इलाके में गर्भवती महिलाओं का रिकार्ड दुरूस्त रखेंगी और कोई भी संदिग्ध केस मालूम होने पर तुरंत अधिकारियों को सूचना देंगी।\\\'\\\' डा.एसबी कंबोज, सिविल सर्जन, फतेहाबाद।