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नवजात शिशुओं को मिलेगी नर्सरी की सुविधा

7 वर्ष पहले
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प्री-मैच्योरऔर नवजात शिशु को नर्सरी सुविधा देने के लिए लोगों को प्राइवेट अस्पताल या पीजीआई पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ऐसे बच्चों को सामान्य अस्पताल में ही सुविधा मिलेगी। इसके लिए विभाग द्वारा एक योजना तैयार की है। योजना को अमली जामा पहनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम बुधवार को अस्पताल का दौरा करेगी और व्यवस्थाओं का जायजा लेगी।

अभी तक अस्पताल में नवजात शिशु के लिए नर्सरी की सुविधा नहीं है। जब भी अस्पताल में जन्मे किसी नवजात को नर्सरी की जरूरत महसूस होती थी तो डॉक्टरों द्वारा शिशु को महिला मेडिकल कॉलेज या पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया जाता है। जिसके चलते सामान्य अस्पताल में लंबे से समय से मरीजों द्वारा शिशुओं के लिए नर्सरी शुरू करने की मांग उठाई जा रही थी। स्वास्थ्य विभाग ने सामान्य अस्पताल में नर्सरी शुरू करने का निर्णय लिया है। जिससे गोहाना के लोगों को इसका फायदा मिल सके। नर्सरी के लिए आवश्यक सुविधाओं का जायजा लेने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम बुधवार को सामान्य अस्पताल का दौरा करेगी।

जिलाके बाद उपमंडल स्तर पर मिलेगी सुविधा :स्वास्थ्यविभाग द्वारा सोनीपत के बाद उपमंडल स्तर पर नर्सरी शुरू करने का निर्णय लिया है। जिसके चलते गोहाना के अलावा गन्नौर और खरखौदा में भी नर्सरी की सुविधा शुरू की जाएगी। सोनीपत में फिलहाल 20 बेड की नर्सरी है। जहां पर आसपास क्षेत्रों से बच्चे रेफर होकर पहुंच जाते हैं। शिशुओं की संख्या बढ़ जाने के कारण वहां भी शिशुओं को रेफर करना पड़ जाता है। इस समस्या का भी योजना के पूरा होने के बाद समाधान हो जाएगा। उपमंडल स्तर पर बनने वाली नर्सरी में 8 से 10 बैड होंगे। नर्सरी में सभी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएगी।

प्रतिमाह 200 डिलीवरी, 20 शिशुओं को करना पड़ता है रेफर: अस्पतालमें प्रति माह 200 गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी होती है। इनमें कुछ डिलीवरी प्री मैच्योर भी होती है। अस्पताल में नर्सरी की सुविधा होने के कारण डॉक्टरों द्वारा मजबूरी में शिशुओं को रोहतक रेफर कर दिया जाता है। प्रतिमाह औसतन 20 शिशुओं को किसी किसी कारण के चलते रेफर कर दिया जाता है। परिजन कभी प्राइवेट तो कभी पीजीआई में भटकते रहते हैं।

बाल रोग विशेषज्ञ की खल रही है कमी

अस्पतालमें बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में मरीजों को इसकी कमी खल रही है। अस्पताल में पहुंचने वाले बच्चों की हड्डी र