पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • सतकुंभा पर कार्तिक पूर्णिमा पर लगा मेला हजारों ने किया स्नान

सतकुंभा पर कार्तिक पूर्णिमा पर लगा मेला हजारों ने किया स्नान

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
कार्तिककी पूर्णिमा को सतकुंभा के कुंड में श्रद्धालुओं ने स्नान किया वहीं यमुना में भी स्नान किया। हिन्दुओं के प्रसिद्ध तीर्थों में एक तीर्थ सतकुंभा खेड़ी गुर्जर में है। यहां पहले चकुआबैन राजा की राजधानी होती थी और यह किला था इसके पास से यमुना बहती थी। यहीं पर एक कुंड था जिसमें स्नान करने से लोगों की मन्नते पूरी होती थी और आज भी ऐसी मान्यता है।

सतकुंभा के पंडित मनोज ने कहा कि साल का 8वां महीना कार्तिक का है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को \\\'कार्तिक पूर्णिमा\\\' कह देते हैं। गांव-देहातों में इसे \\\'कत की पूनों\\\' भी कहते हैं। भक्ति के साथ-साथ सांप्रदायिक सौहार्द है कार्तिक पूर्णिमा भगवान विष्णु, भोले बाबा में श्रद्धा रखने वाले और सिख समुदाय के अनुयायियों के लिए खास दिन है। इस दिन भगवान विष्णु ने पहली बार मछली के रूप में अवतार लिया था। शिव भक्तों का मानना है कि इस दिन भोले बाबा ने त्रिपुरासुर नाम के खूंखार राक्षस का अंत किया था, जिसके बाद से \\\'त्रिपुरारी\\\' कहलाने लगे थे। शिवशंकर के दर्शन करने से सात जन्मों तक ज्ञान और धन की प्राप्ति होती रहती है। देश के कई हिस्सों में यह पूर्णिमा त्रिपुरारी पूर्णिमा नाम से मनाई जाती है। इस दिन जलस्नान, को खास मानते हैं। इस दिन ब्रह्म महूर्त में स्नान, इष्ट देव का पूजन-अर्चन और वंदन करना सुखद रहता है।

सतकुंभाकी महिमा

वयोवृद्घछोटा, देशराज, भलेराम, टेकराम बताते हैं कि खेड़ी गुज्जर में ऐसी मान्यता है कि यहां पर सप्तऋषियों ने तपस्या की थी और इसके लए उनके सात कुंड थे बाद में यह सभी मिल कर एक कुड बने और इसको सतुकंभा कहा जाने लगा। बाबा सीता राम की समाधि है इन्होंने यहां 46 वर्ष तप किया था शरीर छोड़ ने से पहले उन्होंने कहा था कि इस नींव के पेड़ के पास ही उनका अंतिम संस्कार करना वह नीम का पेड़ आज भी है जिसके साथ उनकी समाधि बनी हुई है।

बताते हैं कि जब उनको अग्नि दी गई तो लपटों में नींम का एक पता भी नहीं जला था तब वो छोटा सा पौधा था। इसके बाद ब्रह्मचारी देयीराम ने डेरा चलाया फर सदानंद रहें और अब पंडित मनोज हैं।

श्रद्धालुओंने स्नान किया

सतकुंभापर लगे मेले में हजारों श्रद्धालुओं ने स्नान किया और यहां सुबह चार बजे से आना शुरू और जोत लगाई स्नान किया फिर प्रसाद लिया यहां आलू की सब्जी, पूरी और हलवा आने वाले सभी भक्तों के लिए परोसा गया। सेठपाल छौक