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तिहाड़ मलिक में 8 एकड़ जमीन गोशाला के लिए दी दान, 26 एकड़ में बन रही है गोशाला

5 वर्ष पहले
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गोरक्षा के लिए नयाबांस पंचायत ने की पहल

ऋषिवनआरोग्य ट्रस्ट आगरा से आए पंचगव्य चिकित्सा के प्रचारक डाॅ. विरेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय देशी गो से चिकित्सा मिलती है, आर्थिक वृद्धि आती है, व्याधियां और वास्तु दोष दूर होते हैं। वे गांव नया बांस की ग्राम पंचायत की ओर से शिव मंदिर में रविवार को आयोजित जागृति शिविर में बोल रहे थे।

रोगोंको ठीक करने वाले 24 तत्व मिलते हैं : डाॅ.सुनील यादव ने कहा कि वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें 24 ऐसे तत्व हैं जो शरीर के विभिन्न रोगों को ठीक करने की क्षमता रखते हैं। लगभग 108 रोग इससे ठीक होते हैं। काली बछिया सर्वोत्तम होती है। बूढ़ी, अस्वस्थ गाभिन गाय के मूत्र का प्रयोग करें। इसे कांच या मिट्टी के बर्तन में लेकर साफ सूती कपड़े के आठतहों से छानकर चौथाई कप खाली पेट पी लें।

मोटापा, कैंसर, डायबिटीज, कब्ज, गैस, भूख की कमी, वात रोग, कफ, दमा, नेत्र रोग, धातु क्षीणता, स्त्री रोग, बाल रोग आदि में लाभ मिलता है। गोमूत्र अर्क, औषधियुक्त गोमूत्र अर्क रोगों के हिसाब से, गोमूत्र घनबटी, गोमूत्रासव, नारी संजीवनी, बालपाल रस पमेहारी आदि दवा तैयार की जा सकती हैं। गाय का गोबर विषनाशक है। विषधारी जीव ने काट लिया है तो शरीर को गोबर मूत्र के घोल में डुबा दें। नकसीर आने पर गोबर सुंघाने से लाभ मिलता है। प्रसव को सामान्य कराने के समय गोबर गोमूत्र के घोल को छानकर एक गिलास गोबर गोमूत्र ताजा पिला दें। गोबर की थेपड़ी बना चूर्ण से मंजन दांत के रोग दूर होते हैं।

गगन साध गोशाला तिहाड़ मलिक के प्रधान जितेंद्र मलिक का कहना है कि दानियों के सहयोग से गोशाला का निर्माण कार्य चल रहा है। अभी गोशाला में 2 ट्रेक्टरों, दो ट्रालियों, एक धर्मकांटा, एक पानी की टंकी, एक पानी के टैंक का निर्माण पक्के रास्ते के लिए दानियों की आवश्यकता है। दानियों ने समय समय पर गोशाला के निर्माण में सहयोग दिया है। दानियों के सहयोग से ही गोशाला का अस्तित्व कायम है।

रंजना सभरवाल ने कहा कि गाय के गोबर से प्रतिवर्ष 4500 लीटर बायोगैस मिलती है। सभी इसका प्रयोग करें तो लगभग छह करोड़ 80 लाख टन लकड़ी की बचत होगी है। 14 करोड़ वृक्ष कटने से बचेंगे। एक गाय के दूध, दही, घी, गोबर, गोमूत्र का उपयोग व्यवसायिक तरीके से किया जाए तो उससे मिलने वाली आय से परिवार का आसानी से पालन होगा। गोमूत्र से औषधियां एवं कीट नियंत्रक बनाया जा सकता है। गोबर से काला दंत मंजन , घी को हवन के लिए देने से अच्छी कीमत, दूध को सीधे बेचें, उत्पाद बनाएं। गोवंश कृषि में लाभदायक है।

संदीप सभरवाल ने कहा कि गाय का दूध सम्पूर्ण आहार है। मानव शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व इसमें हैं। गाय का एक पौंड दूध चार अंडों, 250 ग्राम मांस से ज्यादा ताकत देता है। दस्त में ठंडा गोदुग्ध एक गिलास में एक नींबू निचोड़कर तुरन्त पी जावें। टीबी के रोगी को गो दुग्ध दोनों वक्त पिलाएं। गाय के रम्भाने से वातावरण के कीटाणु नष्ट होते हैं। सात्विक तरंगों का संचार होता है। गोघृत का होम करने से आक्सीजन पैदा होती है। गंदगी महामारी फैलने पर गोबर गोमूत्र का छिड़काव कर दें। गोबर गोमूत्र के गंध से वातावरण पवित्र होता है।

सरपंच अनिता ने शिविर का उद्‌घाटन करने बाद कहा कि ग्रामीणों को यहां नि:शुल्क प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी। पूर्व सरपंच दिलबाग ने कहा भारतीय गाय को पालने से हमें आर्थिक लाभ होगा। डा. विरेंद्र सिंह ने कहा कि गाय के मूत्र, गोबर, दूध, दही, घी में औषधीय गुण होते हैं। सबसे पहले गोमूत्र को आयुर्वेद में विषनाशक, रसायन, त्रिदोषनाशक बताया है।

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दूसरी योजना के तहत गाय के गौबर से गत्ता उद्योग स्थापित किया जाएगा। गोशाला प्रांगण के एक हिस्से में यह उद्योग स्थापित होगा। इससे ग्रामीण आंचल में रोजगार के अवसर पर बढ़ेंगे। ताकि गत्तों में वृक्षों के प्रयोग पर कमी आए और वृक्ष कटाई कम हो। इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

तीसरी योजना है कि गाय मार्गों पर बेसहारा के रूप में आवारा घूमती रहती है, जो कई बार दुर्घटना हादसों का शिकार भी होती है। ऐसी गायों के लिए एक टैंपो की व्यवस्था की जाएगी, जिसमें बेसहारा गाय को पकड़कर उसे गोशाला में लाया जाएगा और उसकी सेवा की जाएगी। कोई भी व्यक्ति यहां पर गाय छोड़ने के लिए आएगा तो उससे किसी भी तरह की फीस नहीं ली जाएगी। उल्टा उनका सम्मान किया जाएगा।

तिहाड़ मलिक गांव में निर्माणाधीन गोशाला को प्रदेश की सबसे हाईटेक गोशाला बनाने की प्लानिंग की जा रही है। जिसमें पहले नंबर की योजना है कि गाय के गौबर से पीएनजी गैस प्लांट लगाया जाएगा। बाद में इसका विस्तार कर ग्रामीणों की रसोई तक मीथेन गैस सस्ते दामों पर उपलब्ध कराई जाएगी।

खरखौदा . तिहाड़मलिक गांव में निर्माणाधीन गोशाला।

गन्नौर . स्वदेशीचिकित्सा शिविर में ग्रामीणों को जानकारी देते हुए डाॅ. विरेंद्र सिंह

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