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ज्ञान की देवी मां सरस्वती का वंदन करने से जिह्वा पवित्र होती है : मेघा

5 वर्ष पहले
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वसंतविहार स्थित गायत्री विद्या पीठ में शुक्रवार को बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन किया गया। कार्यक्रम की संयोजिका मेघा भारद्वाज ने कहा कि ज्ञान की देवी मां सरस्वती का वंदन करने से जिह्वा पवित्र होती है। तनुष्का, सुदेश, डिंपल, नीतू त्यागी, सीमा, प्रियंका, चाहत, शिल्पी, पूनम ने मां सरस्वती का वंदन किया।

उन्होंने कहा कि आर्य सभ्यता और संस्कृति का केंद्र उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत हुआ करता था। आर्य-सभ्यता के सारे गढ़, नगर और व्यावसायिक केंद्र सरस्वती के किनारे बसे थे। ऋषियों और आचार्यों के आश्रम सरस्वती के तट पर होते थे। ये आश्रम अध्यात्म, धर्म, संगीत और विज्ञान की शिक्षा और अनुसंधान के केंद्र थे। वेदों, उपनिषदों और ज्यादातर स्मृति-ग्रंथों की रचना इन आश्रमों में हुई ऐसा बताया जाता है। सरस्वती को ज्ञान का भंडार मानते हैं। पुराणों के अनुसार ब्रह्मा ने जब सृष्टि की रचना की तो हर ओर मौन छाया हुआ था।

ब्रह्मा की तपस्या से वृक्षों के बीच से एक नारी प्रकट हुई, जिसके हाथों में वीणा, पुस्तक, माला और वर-मुद्रा थी। जैसे ही उस स्त्री ने वीणा का नाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी, जलधारा को कोलाहल और हवा को सरसराहट मिल गई। ब्रह्मा ने उसे वाणी की देवी सरस्वती का संबोधन दिया। वसंत पंचमी के दिन हम देवी सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मना रहे हैं। सरस्वती की पूजा आर्य सभ्यता-संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान, गीत-संगीत और धर्म-अध्यात्म के कई क्षेत्रों में विलुप्त सरस्वती नदी की भूमिका के प्रति हमारी कृतज्ञता को प्रकट करती है।

गन्नौर . वसंतविहार स्थित गायत्री विद्या पीठ में सरस्वती पूजन करते हुए अध्यापिकाएं और छात्राएं।

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