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प्रभु को बाहर ढूढ़ने की जरूरत नहीं वह हर जगह पर विराजमान है : कविता
गन्नौर| परमात्माको बाहर ढूढ़ने की जरूरत नहीं है। वह तो तुम्हारे घट में ही विराजमान है। कथावाचक कविता भारद्वाज ने दातौली-राकसेड़ा मार्ग पर स्थित प्राचीन पिपलेश्वर महादेव मंदिर में सत्संग में मंगलकारी प्रवचन करते हुए यह संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमारी भावनाएं, श्रद्धा विश्वास अडिग है, अमिट है, यहीं हमारी संस्कृति के प्रतीक हैं। हमारा जीवन इन सभी से जुड़ा हुआ है। यदि हमारी आस्था इनके साथ जुड़ जाए तो जीवन ही प्रेरणा का स्रोत बनता है। हमारे जीवन में यदि प्रकाश, पवन, पानी, पवित्रता और परमार्थ रहेगा तो व्याधि कभी नहीं होगी। ये शास्त्रोक्त कथन है। मानव को दैहिक, दैविक और भौतिक तापों का डर नहीं रहेगा।