पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • डीसी साहब! म्हारे गांव में पानी की निकासी करा दो

डीसी साहब! म्हारे गांव में पानी की निकासी करा दो

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
नरेंद्र शर्मा ‘परवाना’ | गन्नौर

गांवकामी में प्रवेश करते ही गंदा पानी आपका स्वागत करेगा। सड़क पर ही पानी भरा हुआ है, घरों के सामने खड़ा हुआ पानी पक्की सड़क को भी क्षतिग्रस्त कर रहा है, लेकिन इसकी निकासी व्यवस्था नहीं हो पाई है। गांव का हर आदमी इससे परेशान है। कोई गांव में आए तो उसे गंदे पानी से ही होकर गांव में पहुंचना है।

बुधवार को कामी गांव की परिक्रमा करते-करते पहुंचे तो इस गंदे पानी से निकलना पड़ा, यहां सरपंच फूलकुंवार के बारे में पता किया तो उनके पुत्र भरतरी ने फोन उठाया। बात की सरपंच से मिलवाया वे यहां राशन वितरित किया जा रहा था यही पर मिल गए और उनसे गांव के हालात के बारे में चर्चा हुई। सरपंच फूलकुंवार ने बताया कि कामी जनसंख्या 3400 है, जबकि वोट यहां लगभग दो हजार हैं।

65 लाख रुपए आए थे जिसमें छोटी बड़ी 15 गलियां बनवाई एक स्टेडियम की चारदीवारी बादशाही धर्मशाला की चारदीवारी, निकाली, वाल्मीकि बस्ती से शिवमंदिर का नाला बनवाया रोहताश के घर से लीलट केक तालाब तक नाला बनवाया है।

जोगांव को चाहिए : डिस्पेंसरीकी जरूरत है सोनीपत यहां से दस किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।, नाला अधूरा है वो पूर हो तो पानी निकासी हो जाए। इस पर रामनिवास की ओर से पिछली पंचायत के समय से ही केस चल रहा है। इसलिए नाले को बनाने का काम रुका हुआ है।

ग्रामीण सुशीला ने बताया कि यहां पानी की निकासी सिरदर्द बनी हुई है। कोई रिश्तेदार मेहमान जाए तो शर्मिंदा होना पड़ता है। वो अच्छे साफ सुथरे कपड़े पहन कर आए और यहां पानी से गुजरते ही कपड़े गंदे। आप तो अखबार वाले हो, डीसी साहब से पानी की निकासी करा दो जी म्हारे कामी गांव में तो आप ने खुद भी देख लिया। वो सबसे बड़े साहब हैं आकर देख लें, फेर हल करा दें। वहीं जगमती ने बताया गोबर फिरनी के ऊपर पड़ता है इसके लिए सरकार कुरड़ी के गड्ढे दे दें तो तो समस्या दूर हो जाएेगी।

कामी के सरपंच फूलकुंवार ने बताया कि उनके पास दिक्कत तो हैं पानी की निकासी इसलिए नहीं हो पा रही है। कि डीसी कार्यालय एक गांव का है उसने केस करके स्टे ले रखा है। गांव तो चाहता है निकासी हो पंचायत भी चाहती है पानी निकले, लेकिन कोर्ट का आदेश इसमें सरपंच क्या कर सकता है।

रानी ने कहा कि गांव में बंदरों का आतंक है कपड़े फाड़ देते हैं, सब्ती उठा ले जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी तो यह है कि जब बच्चे बाहर बैठकर रोटी खाते हों कोई फल खाते तो वो छीन लेते हैं। बच्चों को थप्पड़ मार कर भाग जाते हैं।

भरपाई का कहना है कि सरकार भले ही बदल गई पर हालात तो नहीं बदले हैं। जनस्वास्थ्य विभाग के पानी का ट्यूबवैल नंबर चार लगाया था। गांधी बस्ती में वो दो साल से ठप पड़ा है। उसके पानी में रेत आवै था लेकिन इब तो कत्ती ठप होग्या।

गन्नौर. गांवकामी में प्रवेश करते ही सड़क पर भरे गंदे पानी से गुजरते हुए ग्रामीण।

रानी।

भरपाई।

सुशीला।