- Hindi News
- टर्मिनल मार्केट के डेवलपमेंट पर करोड़ों रुपए खर्च, व्यापार नदारद
टर्मिनल मार्केट के डेवलपमेंट पर करोड़ों रुपए खर्च, व्यापार नदारद
गन्नौरके जीटी रोड पर 537 एकड़ जमीन पर निर्माणाधीन टर्मिनल मार्केट में अब तक करीब 325 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। मंडी का निर्माण कार्य निर्धारित समय से काफी पीछे भी चल रहा है। साथ ही व्यापार की दृष्टि से अभी यह जीरो है। क्योंकि मंडी में अब तक एक भी यूनिट चालू नहीं हो सकी है। व्यापार शुरू होने के लिए अधिकारी बार-बार केवल डेट लाइन दे रहे हैं। एक पूरी हो जाती है, तो दूसरी डेट लाइन दे दी जाती है। टर्मिनल मार्केट के फेज वन का कार्य वर्ष 2014 में पूरा होना था, जो अब तक पूरा नहीं हो सका है। पहले फेज में फल का व्यापार शुरू होना प्रस्तावित है, लेकिन फल व्यापारी यहां आने से कतरा रहे हैं। क्योंकि हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड द्वारा मंडी में अभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा सकी हैं। अब अगले महीने फल का व्यापार शुरू होने की बात फिर से की जा रही है।
टर्मिनल मार्केट का निर्माण तीन फेज में होना तय किया गया है। जिसके तहत फेज वन का समय बीत चुका है। व्यापार की दृष्टि से मंडी में अब तक सेब का कारोबार शुरू हो जाना चाहिए था। लेकिन अधिकारियों के बार-बार प्रयास के बाद भी कोई व्यापारी सेब लाने को राजी ही नहीं है। व्यापारियों की दलील है कि वह सेब लाएं किसके लिए। किरकिरी से बचने के लिए अधिकारियों ने निजी फर्म को प्रोसेसिंग के लिए जगह बेच दी। लेकिन वह भी अभी तक कुछ खास नहीं कर सकी है।
फार्मेलिटीतक सब सीमित
भारतीयअंतर्राष्ट्रीय बागवानी मार्केट से प्रदेश के व्यापारियों को बड़ी उम्मीद है। लेकिन सवाल यह है कि वह उम्मीद पूरी कब होगी। मंडी के निर्माण को चार साल का समय बीत चुका है। लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक केवल फ्रंट का निर्माण कार्य ही है। व्यवसाय के लिए जो भी लोग सामने रहे हैं, वह भी जमीन खरीदकर छोड़ दे रहे हैं। जिस कारण कुछ व्यापार शुरू ही नहीं हो पाया है। अब तक सीवर पानी की व्यवस्था भी नहीं हो पाई, जिसे पहले फेज में सबसे ऊपर रखा गया था।
एसडीओ सुभाष कुमार ने बताया कि मंडी में 18 करोड़ रुपए से इन दिनों विकास कार्य हो रहा है। जिसमें सड़कों का निर्माण, कवर्ड शेड जो 192 मीटर लंबा और 56 मीटर चौड़ा है। लागत आठ करोड़, पेयजल सप्लाई लाइन, सीवर सिस्टम सहित स्टॉर्म वाटर और पीछे के हिस्से में बाउंड्री वाल का निर्माण। उन्होंने कहा कि अगर 165 एकड़ जमीन को छोड़ दें तो सभी जमीन पर कुछ कुछ कार्य हो रहा है।
मार्केट के निर्माण को लेकर हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड द्वारा अलग-अलग कामों के लिए अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है। इसके अलावा व्यापार को बढ़ाने के लिए मैनेजर भी नियुक्त किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ खास नजर नहीं रहा है। मंडी में अब तक 100 नेशनल एग्रीकल्चर ट्रेड सेंटर का निर्माण, दो कवर्ड शेड, दो शेड, कुछ सड़कों का निर्माण, चार दीवारी, फाउंटेन, मेनगेट, पार्क अधिकारी कर्मचारी कार्यालय सहित कुछ दुकानों का निर्माण किया गया है।
हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड के अधिकारियों ने जनवरी 2014 में व्यापार शुरू होने की बात की थी। जिसके लिए आईजी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड को कवर्ड कोल्ड स्टोर और दो शेड किराए पर दिए गए हैं। कहा गया था कि यह कंपनी यहां पर फ्रूट प्रोसेसिंग का कार्य करेगी। लेकिन यहां पर आज तक तो कई फल विक्रेता आया और ही इस कंपनी ने कार्य शुरू किया। हालांकि इस कंपनी को व्यापार जगत में एप्पल किंग के नाम से जाना जाता है। इसी तरह जिन व्यापारियों ने दुकानें खरीदी उन्होंने अब तक निर्माण कार्य भी शुरू नहीं किया।
सोनीपत . गन्नौरके जीटी रोड पर 537 एकड़ में बनी हुई टर्मिनल मार्केट।