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भगवे पर विश्वास तो करो, लेकिन अंध विश्वास नहीं : शंभूदत्त
पंडितशंभूदत्त ने कहा कि भगवे पर विश्वास तो करो, लेकिन अंध विश्वास नहीं। पैसे लेकर पैसे देकर सत्संग करने से संगत नहीं होती। सत्संग सत्य का साथ है सत्य एक प्रभु है। वे दातौली-राकसेड़ा मार्ग पर स्थित प्राचीन पिपलेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित सत्संग समारोह में मंगलकारी प्रवचन कर रहे थे
उन्होंने कहा कि भगवा वस्त्र आदर का सूचक है। भगवा वस्त्र पहनने वाले की अपने विवेक रूपी तीसरे नेत्र से पहचान हो। जब संन्यासी बनते हैं तो भिक्षा मांगना जरूरी होता है, इससे अहंकार टूटता है। अहंकार टूटने से ही संत शाश्वत सत्य प्रभु से जुड़ता है। भिक्षा पैसे की नहीं बल्कि रोटी की मांगी जाती है। जब इंसान गिरता है तो उसे संत बचाता है और यदि संत गिरता है तो उसे बचाने वाला कोई नहीं होता। उन्होंने कहा कि गुरु कीजिए जानकर, पानी पीजिए छान कर यह बात शास्त्रों में इसलिए कही है कि गुरु जीवन का निर्माण है हम अपना जीवन ज्ञान के उजाले में प्रकाशमान करें। रामचरित मानस हमें जीना सिखाता है विश्व का महान ग्रंथ गीता मरना सिखाता है। गीता में कृष्ण ने अर्जुन को ब्रह्म का ज्ञान दिया। कर्म को प्रधान बताया और हे अर्जुन अपने शस्त्र उठा वरना तेरा धर्म भ्रष्ट हो जाएगा। मिटा दे अपनी हस्ती को अगर मरतबा चाहे दाना खाक में मिलकर गुल गुलजार होता है। भंडारे की सेवा में राधेश्याम, मूर्ति, कविता, पंमेश्वरी, सोमदत्त, शंकर, दयानंद, रामफल, मुकेश पंवार, अनिल, मोनू, जगबीर आदि स्वयं सेवक रहे।