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सत्संग समाज का एक आइना है : कुलदीप

7 वर्ष पहले
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सत्संगएक आइना है। इसमें हम अपने आप को देखकर आवश्यक सुधार कर सकते हैं। सत्संग में सतगुरू दिशा बदलकर कर्मों को नकारात्मक से सकारात्मक दिशा में मोड़ देते हैं। इसलिए लाेगों को सत्संग में जाकर ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। यह कहना है महात्मा कुलदीप कत्याल का। कुलदीप कत्याल रविवार को महम रोड़ स्थित निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित निरंकारी साप्ताहिक सत्संग समारोह में संगत को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सत्संग में आने के बाद ही हम स्वयं को देखकर अपनी जीवन शैली में परिवर्तन कर सकते हैं। सत्संग में आने से पहले हमारी जिंदगी कुछ अलग होती है, लेकिन सत्संग में आने के बाद हमारी जीवन शैली पूर्ण रूप से बदल जाती है। उन्होंने कहा कि सतगुरू हमारे कर्मों की दिशा बदलकर नकारात्मक से सकारात्मक दिशा में मोड़ देते हैं। एक जलता हुआ दीपक ही दूसरे दीपक को जला सकता है।

गोहाना. महमरोड स्थित निरंकारी सत्संग भवन में सत्संग सुनते श्रद्धालु इनसेट में प्रवचन करते कुलदीप कात्याल।