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संस्कार के अनुरूप होता है मनुष्य का व्यवहार: यमुना

5 वर्ष पहले
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मुगलपुरस्थित दुर्गा मंदिर में आयोजित रामकथा के चौथे दिन साध्वी यमुना दीदी मां ने संस्कारों के बारे बताया। उन्होंने कहा कि संस्कार एक आईने के समान होते हैं। बच्चों को जिस प्रकार के संस्कार दिए जाते हैं, उनका व्यवहार वैसा ही होता है। बच्चों को शुरू से ही अच्छे संस्कार दिए जाने चाहिएं।

भगवान राम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान राम मर्यादा पुरूषोत्म थे। वे अपने माता-पिता के कथनों को आदेश मानकर उनका अनुसरण करते थे। कथा में उन्होंने बताया कि महर्षि विश्वामित्र यज्ञ के दौरान राक्षसों से उनकी रक्षा करने के लिए राजा दशरथ से सहायता मांगने के लिए अयोध्या जाते हैं। इस पर राजा दशरथ स्वयं चलने के लिए तैयार हो जाता है। महर्षि ने राम को उसके साथ भेजने का आग्रह किया। गुरू के आदेश की पूर्ति के लिए दशरथ राजा राम को भेजने के लिए तैयार हो जाता है। पिता की आज्ञा लेकर राम और लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ चल पड़ते हैं। रास्ते में घने जंगल में उनका सामना ताड़खा राक्षसी से होता है। साध्वी यमुना ने बताया कि भगवान राम राक्षसी का वध कर महर्षि की रक्षा करते हैं। इसके पश्चात वे जनकपुरी की ओर प्रस्थान करते हैं। जनकपुरी में राजा जनक की पुत्री सीता का स्वयंवर चल रहा था। स्वयंवर जीतने के लिए भगवान शिव के धनुष पर बाण चढ़ाना था। भगवान राम ने जैसे ही धुनष पर बाण चढ़ाया ताे धनुष बीच से टूट गया। धनुष टूटने पर जनकपुत्री सीता ने राम को वरमाला पहना दी।

गोहाना . मुगलपुरास्थित दुर्गा मंदिर में आयोजित रामकथा में प्रवचन सुनते हुए श्रद्धालु महिलाएं।

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