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भगवान राम के वन में जाने पर महाराज दशरथ ने त्याग दिए थे प्राण : यमुना

5 वर्ष पहले
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मुगलपुरारोड स्थित दुर्गा मंदिर में साध्वी यमुना दीदी मां ने पुत्रवियोग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम अपने पिता दशरथ के वचनों को पूरा करने के लिए वनों में चले गए। पुत्र वियोग के चलते राजा दशरथ की मृत्यु हो जाती है।

उन्होंने बताया कि राजा की मृत्यु होने पर भारत ननिहाल से वापिस लौटते हैं। महल में हर तरफ शोक छाया हुआ था। उन्होंने बड़े भाई राम और लक्ष्मण के बारे में पूछा तो बताया गया राम, लक्ष्मण तथा सीता 14 वर्ष के लिए वन में चले गए हैं। अयोध्या का राज्य उन्हें ही संभालना है। इससे भरत का मन विचलित हो जाता है। वह शत्रुघन के साथ भगवान रामचंद्र को लेने के लिए वन की ओर चल पड़े। भगवान राम से भरत के मिलाप का वर्णन करते हुए साध्वी यमुना ने कहा कि राम से मिलने के बाद भरत की आंखों से आसुओं की धारा बह निकली। उन्होंने भगवान राम के पैर पकड़कर लक्ष्मण माता सीता के साथ वापिस महल लौटने का आग्रह किया। भगवान राम ने उन्हें समझाते हुए कहा कि वे पिता राजा दशरथ के वचन की पूर्ति के लिए 14 वर्षों तक वनवास में आए हैं। वनवास की अवधी पूर्ण होने के बाद ही वे अयोध्या वापिस लौटेंगे। इसके बाद भरत भगवान राम की चरण पादूकाएं लेकर अयोध्या लौट आया।

इस अवसर पर मंदिर के प्रधान गुलशन नारंग, मदनलाल, नंदलाल नारंग, अमरनाथ, सुरेंद्र मेहता, भगवानदास, आनंद, कृष्णलाल चुघ, सतीश मधू, सन्नी ढंग आदि उपस्थित थे।

साध्वी यमुना दीदी

गोहाना . मुगलपुरास्थित श्री दुर्गा माता मंदिर में आयोजित रामकथा में प्रवचन सुनते हुए श्रद्धालु महिलाएं।

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