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प्रेम से ही प्राप्त कर सकते हैं ईश्वर को
गोहाना. महमरोड स्थित निरंकारी सत्संग भवन में कार्यक्रम में उपस्थित संगत। तथा इनसेट में प्रवचन देते निरंकारी महात्मा जीपी चढ्ढा।
भास्कर न्यूज | गोहाना
जोइंसान संपूर्ण मानव जाति से प्रेम करता है उसका जीवन करूणा, शीतलता, अनुशासनात्मक गुणों से भर जाता है। वह प्राणी जगत के हर जीव में परमात्मा का वास मानकर उससे प्रेम करने लगता है। जिससे उसके जीवन के सभी विकारों का विनाश हो जाता है और जीवन खुशियों से भरपूर हो जाता है। यह कहना है निरंकारी महात्मा जीपी चढ्ढा का।
वे रविवार को महम रोड़ स्थित निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित साप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम में संगत को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संपूर्ण प्राणी जगत से प्रेम करना ही ईश्वर की प्राप्ति का एकमात्र साधन है। उन्होंने संगत को द्वेष घृणा जैसे भावों से मुक्त रहकर सादगी और नम्रता के भावों को ग्रहण कर हर जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करने का मार्ग दिखाया और जरूरतमंद आपदा में फंसे लोगों की हर संभव सहायता करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि परमात्मा सभी को प्रेम करना सिखाता है। परंतु मानव लालच और आगे बढ़ने की दौड़ के चलते दूसरों से ईष्र्या करने लग जाता है। मानव को सभी आदमियों से प्रेम करना चाहिए।