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बदलता मौसम लोगों को कर रहा बीमार

6 वर्ष पहले
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मौसमका मिजाज लगातार बदल रहा है। कभी बूंदाबांदी तो कभी धूप तेज हो जाती है। मौसम का उतार-चढ़ाव लोगों की तबीयत खराब कर रहा है। अस्पतालों में वायरल फीवर, कोल्ड, कफ की चपेट में आए लोगों की तादात बढ़ रही है। सामान्य अस्पताल में प्रतिदिन 70 से अधिक मरीज वायरल फीवर से पीडित पहुंच रहे हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि कडाके की ठंड के बाद अचानक शुरू हुई बूंदाबांदी और अब तेज धूप ठंडी हवा के चलते वायरल तथा बैक्टिरिया को हावी होने का मौका मिल गया है। मौसम की मार सबसे अधिक बच्चों पर पड़ रही है। इसलिए बच्चों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत हैं। डॉ. रीटा गोयल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से मोसम में बदलाव हो रहा है।

दिन के समय खूप खिली रहती है, जिसके कारण लोगों को ठंड से कुछ राहत तो मिली है, लेकिन सुबह शाम की ठंड ने लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 70 मरीज ऐसे होते हैं, जो सर्दी, खांसी एवं जुकाम जैसी बिमारियों से ग्रस्त हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों में बच्चों की संख्या अधिक है। उन्होंने बताया कि बदलते मोसम में हमारा शरीर अचानक बदलाव के लिए तैयार नहीं होता है, इसलिए लोग बुखार तथा अन्य मोसम संबंधी बीमारियों की चपेट में रहे हैं। दिन में धूप निकलने से तापमान कुछ गर्म हो जाता है, लेकिन सुबह एवं शाम को ठंड रहती है। इस मौसम में बच्चे तथा वृद्ध जल्दी प्रभावित होते हैं।

बदलते मौसम में लापरवाही नहीं करनी चाहिए। ऐसे मौसम में लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। जरा सी भी लापरवाही हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। विशेषकर बच्चों को ऐसे मौसम में सावधानी बरतनी चाहिए।

डॉ.ईश्वर सिंह पूनिया ने बताया कि ठंड के बाद पिछले कई दिनों से लोगों को तेज धूप का सामना करना पड़ रहा है। इससे अचानक युवाओं ने समय से ही स्वेटर, जैकेट्स आदि उतार दिए है। कुछ दिन पहले सर्द हवाओं और बारिश से सर्दी लौट आई थी। उन्होंने कहा कि दिन में धूप निकलने से तापमान कुछ गर्म हो जाता है, लेकिन सुबह एवं शाम को ठंड रहती है। इस मौसम में बच्चे तथा वृद्ध जल्दी प्रभावित होते हैं। बदलते मौसम में लापरवाही नहीं करनी चाहिए। सुबह-शाम गर्म कपड़ों से शरीर को ढककर रखें। यदि कोई दिक्कत हो तो डॉक्टर की सलाह लें।

वायरलके अलावा चेस्ट डिजिज ने भी किया परेशान

डॉ.कपिलदेव ने बताया कि वायरल के अलावा चेस्ट डिजिज की दिक्कतें भी देखी जा रही है। शाम के समय मौसम ठंडा होने से अभी भी कई लोग ब्लोअर-हीटर चला रहे हैं। जिससे आसपास आक्सीजन कम हो जाती है। जिससे सांस फूलने लगती है, बीपी बढ़ जाता है। सफोकेशन की वजह से चेस्ट प्रॉब्ल्म शुरू हो जाती है। सुबह-शाम पड़ रहे हल्के फाॅग और स्मॉक से चेस्ट की परेशानी बढ़ रही है।

{अचानक जैकेट स्वेटर पहनना बंद करें।

{सुबह शाम छोटे बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं।

{रूम में क्रास वंटिलेशन बनाए रखे।

{बड़े बीमार हो तो बच्चों को पास भेजें।

{खांसते या छींकते समय मुंह नाक जरूर ढंके।

{सफर करते समय मुंह नाक ढककर रखें।

{खाने से पहले हाथ अवश्य धोएं।

{बच्चों में बैचेनी, दूध पीना, पसलियां धंसने जैसे लक्षण दिखाई तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

गोहाना . सामान्यअस्पताल में बच्चे की जांच करते हुए डॉ. रीटा गोयल।