भक्तों के कष्ट दूर करते हैं भगवान: यमुना
गोहाना | मुगलपुरास्थित दुर्गा मंदिर में आयोजित रामकथा के छठे दिन साध्वी यमुना ने भक्ति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि निस्वार्थ भाव से ईश्वर की भक्ति करने से जीवन में खुशहाली आती है। ईश्वर अपने भक्तों के कष्टों का निवारण करने के लिए अनेक रूपों में जन्म लेते हैं। भगवान राम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम ने अहिल्या का उद्धार कर उसे श्राप से मुक्ति दिलाई थी। उन्होंने स्वयं उनके पास जाकर स्पर्श कर श्राप से मुक्त किया था। पिता दशरथ के वचन की पूर्ति के लिए राम 14 वर्ष के लिए वन की ओर चल पड़ते हैं। उनके साथ माता सीता और लक्ष्मण भी चल पड़ते हैं। रास्ते में उन्होंने गंगा नदी पार करने के लिए उन्होंने केवट से नाव की मांग की। लेकिन केवट ने अज्ञानता के चलते नाव देने से मना कर देते हैं। केवट कहता है कि उनके पैरों में जादू है। उनके स्पर्श से नाव नारी में बदल जाएगी। नाव पर बैठाने से पूर्व केवट स्वयं उनके पैरों को धोने का आग्रह करता है। इस पर भगवान राम सहमत हो जाते हैं। केवट ने भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के पैर धोकर नाव पर बैठाकर गंगा पार करवाते हैं।