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नए बैच की तैयारी शुरू, बंद पड़े कार्य से बढ़ी है परेशानी

7 वर्ष पहले
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महिलामेडिकल कॉलेज में छात्राओं का नया बैच शुरू करने की कवायद तेज कर दी है। जीपीआई रोहतक की टीम द्वारा व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया जा चुका है। नए बैच के लिए बिल्डिंग का निर्माण कार्य बंद पड़ा हुआ है। इससे कॉलेज प्रशासन की चिंता बढ़ती जा रही है। क्योंकि इस वर्ष डॉक्टरी की पढ़ाई करने आई छात्राओं काे हास्टल और अन्य सुविधा मुहैया कराने में परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसे देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने निर्माण एजेंसी से निर्माण कार्य शुरू करने को कहा है।

कॉलेज प्रशासन को नया बैच शुरू करने के लिए हर बार एमसीआई से मंजूरी लेनी पड़ती है। इसके लिए संबंधित विवि के अलावा एमसीआई की टीम द्वारा कॉलेज का दौरा करके व्यवस्थाओं का जायजा लिया जाता है। जिसमें यह देखा जाता है कि यदि नया बैच शुरू किया जाए तो छात्राओं को क्या-क्या सुविधा मिलेगी। कॉलेज की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए पिछले दिनों एक टीम ने दौरा भी किया था।

एमओयूहोने से बंद हुआ था निर्माण: मेडिकलकॉलेज में दूसरे चरण के अंतर्गत करीब 12 भवनों का निर्माण कार्य किया जाना था। निर्माण एजेंसी और सरकार के बीच एमओयू साइन नहीं हुआ था। जिससे सरकार की तरफ से बजट जारी नहीं हो सका। जबकि एजेंसी ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया था। एजेंसी द्वारा करीब 20 प्रतिशत कार्य भी कर दिया था। परंतु बजट के अभाव के चलते फरवरी माह में निर्माण कार्य कार्य बंद कर दिया गया था। एजेंसी ने जिन लोगों को आगे ठेका दिया हुआ था, उनकी भी पेमेंट नहीं हो पाई। अब वे अपनी पेमेंट के लिए लगातार चक्कर लगा रहे हैं।

अक्टूबर14 में पूरा होना था कार्य : दूसरेफेज के अंतर्गत छात्राओं और डॉक्टरों को सुविधाएं मुहैया कराई जानी थी।

जिसके अंत र्गत लेक्चर हॉल, डॉक्टर और डायरेक्टर के लिए आवास सहित करीब 13 भवनों का निर्माण किया जाना था। इस कार्य पर करीब 87 करोड़ रुपए खर्च किए जाने थे और निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य अक्टूबर 2014 रखा था।

परंतु निर्माण कार्य अभी तक केवल 10 प्रतिशत होने के बाद बजट के अभाव में आठ माह से बंद पड़ा हुआ है। इंजीनियरों की माने तो यदि निर्माण कार्य शुरू होता है तो कार्य पूरा करने में करीब एक साल लगेगा।

^सरकार और निर्माण एजेंसी के बीच एमओयू साइन हो चुका है। निर्माण कार्य शुरू करने के लिए निर्माण एजेंसी को कहा गया है। ताकि जल्द से जल्द भवन निर्माण कार्य पूरा