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28 की बजाए 40 दिन में छोड़ा जाएगा पानी

5 वर्ष पहले
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सिंचाईविभाग ने नहरों में पानी के छोड़ने के शैड्यूल में बदलाव किया है। नहर में पानी 28 की बजाए 40 दिन ही आएगा। मौसम में बदलाव रहा है। गर्मी बढ़ने पर पानी की मांग भी बढ़ेगी। ऐसे में नहरी पेयजल परियोजना से जुड़े क्षेत्र में पानी की समस्या बढ़ेगी। क्योंकि तालाब में पानी का स्टॉक केवल कुछ दिन के लिए ही किया जा सकता है। इसे लेकर अधिकारी चिंतित है। विभाग कहना है कि गर्मी के मौसम में पेयजल की समस्या बढ़े, इसके लिए लोगों को पानी के दुरूपयोग को रोकने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

जिस तरह से भू-जल स्तर लगातार कम हो रहा है, उसे देखते हुए सरकार द्वारा नहरी पानी को पेयजल के रूप प्रयोग करने पर जोर दिया जा रहा है। इस परियोजना पर सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। क्योंकि नहर में पानी साल भर नहीं रहता, इसलिए विभाग द्वारा गांव और शहर में तालाब का निर्माण किया गया है। जिसमें पानी का स्टॉक किया जाता है। स्टॉक से केवल एक माह तक ही लोगों की मांग को पूरा किया जा सकता है। सिचांई विभाग ने नहरी पानी का शैड्यूल 28 की बजाए 40 दिन किया है। ऐसे में गर्मी में पानी की किल्लत बढ़ सकती है। गर्मी में वैसे भी पानी की खपत अधिक होती है।

विभागने समस्या से निपटने की बनाई रणनीति : इससमस्या से निपटने के लिए जलापूर्ति विभाग ने अभी से रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। विभाग के अनुसार पानी के दुरूपयोग को रोकने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा। वहीं पानी की सप्लाई का समय कम किया जाएगा। जिससे तालाब में पानी का जो स्टॉक है, उसे नहर में पानी आने तक प्रयोग किया जा सके। तथा लोगों को पेयजल मिलता रहे। साथ ही जहां पर ट्यूबवैल लगाए गए थे और वे अब काम नहीं कर रहे हैं। उनकी मरम्मत कराई जाएगी।

^ मुख्यालय द्वारा नहरी पानी की सप्लाई के शैड्यूल में बदलाव किया गया है। नए शैड्यूल अनुसार अब सिंचाई के लिए 40 दिनों के बाद नहरों में सप्लाई दी जाएगी। इस बारे में जलापूर्ति विभाग के अधिकारियों को सूचित किया जाएगा। \\\'\\\' नवतेजसिंह, एक्सईएन, सिंचाई विभाग गोहाना

गोहाना उपमंडल में करीब 1.68 लाख एकड़ कृषि भूमि है। इसमें से करीब 70 हजार एकड़ भूमि की नहरी पानी द्वारा सिंचाई होती है। शेष भूमि की सिंचाई के लिए किसानों को ट्यूबवैलों पर ही निर्भर करना पड़ता है। नहरी पानी के शैड्यूल में परिवर्तन होने पर किसानों की भी समस्या बढ़ेगी। किसानों को नहरी पानी के लिए 40 दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा। भाकियू के रोहतक मंडल के अध्यक्ष सत्यवान नरवाल का कहना है कि वैसे भी नहरों में पानी कम रहा है। पानी छोड़ने का समय बढ़ाने पर किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। किसान पंप लगाकर फसल की सिंचाई करेंगे तो फसल पर लागत बढ़ेगी। वैसे भी सरकार द्वारा फसल का मूल्य बहुत ही कम दिया जाता है। इससे किसान कर्जवान होते जा रहे हैं।

गोहाना शहर के साथ-साथ क्षेत्र के 55 गांव में नहरी पानी की सप्लाई की जाती है। इनमें बरोदा विधानसभा क्षेत्र में 35 और गोहाना विधानसभा क्षेत्र में 20 गांव हैं। शहर में भी नहरी पानी की सप्लाई की जाती है। इस परियोजना को बीते वर्ष ही विभाग ने शुरू किया था। परियोजना पर करीब 42 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। इसके बाद भी लोगों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है। बीते माह से विभाग पानी की सप्लाई एक समय दे रहा है।

गोहाना. रोहतकडिस्ट्रीब्यूटरी में भरा पानी।

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