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आरयूबी पर दो करोड़ खर्च फिर भी पानी बना परेशानी

6 वर्ष पहले
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रोहतक-पानीपत रेलवे ट्रैक पर महमूदपुर गांव के पास मानवरहित फाटक को बंद करके रेलवे आरयूबी का निर्माण कर दिया। इससे फाटक पर होने वाले हादसों में कमी तो आई, लेकिन आरयूबी के आसपास गांव के लोगों की समस्या बढ़ गई। रेलवे ने आरयूबी में भरने वाले पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं की। जिसके चलते आरयूबी में अक्सर पानी भरा रहता है।

पिछले दिनों आरयूबी के पास गेहूं के खेत की सिंचाई करते समय पानी भर गया। पानी भरे करीब एक सप्ताह हो चुका है। अब भी आरयूबी में दो से तीन फीट तक पानी भरा हुआ है। ग्रामीण जान को जोखिम में डाल रेलवे ट्रैक को पार करने को मजबूर है। ग्रामीणों ने रेलवे से आरयूबी में भरने वाले पानी की निकासी करने की व्यवस्था करने की मांग की है। जिससे आरयूबी समस्या बनकर उनके लिए सुविधा बन सके।

रेलवे ने बीते वर्ष करीब दो करोड़ की लागत से महमूदपुर गांव के पास आरयूबी का निर्माण किया था। जहां पर ट्रैक है, वहां पर आरयूबी की गहराई करीब दस फीट है, जो सड़क से करीब पांच से छह फीट नीचे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी बरसात होती है तो पानी भर जाता है। इस पानी को बाहर निकालने की व्यवस्था रेलवे ने नहीं की है। जिसकी वजह से पानी काफी दिनों तक आरयूबी में ही भरा रहता है। ऐसे में ट्रैक भी धंसने का अंदेशा बना रहता है।

पानी लंबे समय तक भर जाने के कारण महमूदपुर, सिवानका, रामगढ़ और सैनीपुरा गांव के लोगों को आरयूबी का फायदा नहीं मिलता। ग्रामीणों को खेतों तक पहुंचने के लिए या तो आरओबी के ऊपर से ट्रैक पार करना पड़ता है या फिर चार किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। ऐसे में ग्रामीणों की समस्या बढ़ गई है।

10फीट ऊंचा 13 फीट चौड़ा है आरयूबी : रेलवेद्वारा आरयूबी करीब 10 फीट ऊंचा और 13 फीट चौड़ा बनाया गया है। यह ऊंचाई भविष्य की योजना को दृष्टिगत रखते हुए बनाई है। प्रशासन की पानीपत-रोहतक हाइवे से जींद रोड को जोड़ने के लिए रिंग रोड का निर्माण करने की योजना है। इसे देखते हुए आरयूबी की ऊंचाई अधिक रखी थी, जिससे ट्रैक्टर मिनी बस आसानी से निकल सके। लेकिन इसके नीचे पानी भरने की समस्या ने लोगों को परेशान कर रखा है।

कई बार तो बाइक साइकिल चालको को गहराई का पता नहीं चलता तो वे पानी में ही गिर जाते हैं। इससे उनके जहां कपड़े खराब हो जाते हैं वही सामान भी भीग कर खराब हो जाता है। लोगों का कहना है कि करोड़ों खचे के बाद भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।