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गेहूं की फसल में पीला रतवा की बीमारी ने दी दस्तक

6 वर्ष पहले
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गेहूं की फसल में पीला रतवा लगने से किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। इस बीमारी का सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। यह एक फफुंद जनित रोग है, जिसमें गेहूं की पत्तियों पर पीले रंग के धबे पड़ जाते हैं। कृषि विशेषज्ञों ने पीले रतवे की रोकधाम के लिए किसानों को प्रोपीकोनाजोल दवा के छिड़काव की सलाह दी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फसल में खाद की कमी तथा अधिक समय तक पानी खड़ा रहने से फसल में पीलापन जाता है। इसलिए किसान विशेषज्ञों से सलाह लेकर उचित मात्रा में खाद का प्रयोग करें।

मौसम में हो रहे बदलाव से जहां लोगों को सर्दी से कुछ राहत मिली है। वहीं किसानों के लिए परेशानी बढ़ गई है। कुछ क्षेत्रों को पीला रतवा की बीमारी ने गेहूं की फसल को अपनी चपेट में ले लिया है।

किसान रामचंद्र, जयनारायण, जीतराम ने बतायया कि गेहूं के पौधों के पत्ते अचानक पीले हो गए। इससे उनकी परेशानी बढ़ गई हैै

इस बारे में जब कृषि विशेषज्ञों से संपर्क किया तो उन्होंने इसका उपाय बताया। इस बीमारी से गेहूं के उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है तथा फसल की बढ़वार भी प्रभावित होती है। कृषि विशेषज्ञ एसडीओ राजेंद्र मेहरा ने बताया कि गेहूं में पीला रतवा की बीमारी की रोकथाम के लिए प्रोपिकोनाजोल की 200 एमएल दवा को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। दवा के छिड़काव से बीमारी से कॉफी राहत मिलेगी।

गोहाना . गेहूंकी फसल में छिड़काव करता हुआ किसान।