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केंद्र प्रदेश के अधिकारियों की टीम ने किया शामड़ी गांव का दौरा, किसानों से बातचीत कर जुटाई जानकारी, केंद्र राज्य सरकार को दी जाएगी रिपोर्ट
पशुपालक मछली पालक भी हुए प्रभावित
किसानईश्वर सिंह, कर्मबीर, राजेंद्र, संदीप ने बताया कि शामड़ी में सूखे के चलते हजारों एकड़ फसल खराब हो गई। क्षेत्र के काफी किसान ऐसे है, जिन्होंने धान या दूसरी फसलों की बिजाई तो की, लेकिन मानसून आने के कारण फसलों को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाया। जिससे फसल खराब होनी शुरू हो गई। किसानों ने बताया कि सूखे के चलते पशुओं को भी हरा चारा नहीं मिल पाया। इससे दूध का उत्पादन भी कम हो गया। सूखे के चलते मछली पालन भी व्यापक स्तर पर प्रभावित हुआ।
नरेंद्र मोदी के राष्ट्रभाषा हिंदी को बढ़ावा देने के लिए सभी मंत्रालय को हिंदी में कामकाज करने के आदेश दिए थे। इसका प्रभाव रविवार को भी देखने को मिला। शामड़ी गांव में पहुंची टीम के एक अधिकारी सूखे से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए किसान से अंग्रेजी में बातचीत करने लग गए। जब एमडी मिश्रा ने आला अधिकारी को अंग्रेजी बोलते हुए सुना तो उन्होंने अधिकारी को फटकार लगाई
गोहाना. शामड़ीगांव में किसानों से बातचीत करतीं आईएएस वसुंधा मिश्रा अन्य अधिकारी।
सूखे की मार का जायजा लेने खेतों में पहुंचे आला अफसर
भास्कर न्यूज | गोहाना
इसबार मानसून ने किसानों को बार-बार धोखा दिया। पानी के अभाव में किसानों की फसल सूख गई। नुकसान अधिक बढ़ते देख किसान भी फसल में ट्रैक्टर चलाने के लिए मजबूर हो गए थे। किसानी की मांग पर केंद्र सरकार ने प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया। रविवार को केंद्र और प्रदेश के विभिन्न विभागों के अधिकारियों की टीम शामड़ी गांव में पहुंची और पीड़ित किसानों से बातचीत की। दल ने सूखे के संबंध में अपनी गोपनीय रिपोर्ट भी तैयार की। रिपोर्ट को केंद्र प्रदेश सरकार को सौंपी जाएगी।
टीम में केंद्र से नेशनल सेंटर फार डिजिज कंट्रोल (एनसीडीसी) की एमडी आईएएस वसुंधा मिश्रा, केंद्रीय पेयजल सेवाओं से विजय कुमार बाठला, रवि भूषण, मनोजीत-डे रामराज मीणा, प्रदेश के कृषि विभाग के महानिदेशक आईएएस ब्रिजेंद्र सिंह के अलावा अन्य उच्च अधिकारी शामिल थे। अधिकारियों का दल शामड़ी में पहुंचा और वहां पर सूखे से प्रभावित खेतों को देखा। उन्होंने सूखे से पीड़ित किसानों से भी बातचीत की। जिसके आधार पर अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट तैयार की। अधिकारियों ने बताया कि रिपोर्ट को पूरी तरह से गुप्त रखा गया। इस मौके पर कृषि विभाग के उप कृषि निदेशक डॉ.