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मदवि का बोझ कम करने के लिए बीपीएस से जोड़े जाएं कॉलेज

7 वर्ष पहले
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महर्षिदयानंद विवि पर काम का बोझ अधिक है। जिसके चलते परीक्षा परिणाम तैयार करने में अक्सर कोई गलती हो जाती है। इसे ठीक कराने के लिए छात्रों को विवि के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। आने-जाने में छात्रों को रुपए खर्च करने पड़ते हैं। सरकार ने खानपुर में महिला विवि स्थापित किया गया है। इसके साथ अन्य कोई कॉलेज नहीं जोड़ा है। यदि विवि को परीक्षा से संबंधित जिम्मेदारी या फिर जिले के कॉलेजों को महिला विवि से जोड़ दिया जाए तो छात्रों को इसका काफी फायदा होगा। यह कहना है अखिल भारतीय विवि एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ के प्रदेश प्रवक्ता पवन लठवाल का।

लठवाल ने कहा कि छोटे-छोटे काम को लेकर छात्रों को रोहतक जाना पड़ता है। जहां पर छात्र इधर-उधर घूमते रहते हैं। इससे पैसे तो खराब होते ही है, साथ में पढ़ाई भी प्रभावित होती है। जिस दिन भी छात्र अपने कार्य को लेकर रोहतक चले जाते हैं, उस दिन वे कॉलेज में नहीं पाते। इसका सीधा नुकसान छात्रों को होता है। सरकार ने जब जिले में करोड़ों रुपए की लागत से विवि स्थापित किया है तो जिले के कॉलेजों को इसके साथ जोड़ना चाहिए था। सरकार ने तकनीकी कॉलेजों को छोटूराम विवि के साथ जोड़ दिया। यदि कॉलेज महिला विवि से जुड़ जाएंगे तो उन्हें रोहतक के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

छात्रों को संगठित करने के लिए कराए जाएं छात्र संघ चुनाव

छात्रोंकी समस्याओं को उठाने के लिए उनका अपना कोई संगठन नहीं है। देश के विभिन्न राज्यों में छात्र संगठन बनाए गए हैं। जिनके प्रतिवर्ष चुनाव भी कराए जाते हैं। परंतु हरियाणा में चुनाव पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। लठवाल का मानना है कि यदि कॉलेज स्तर पर छात्रों का मजबूत संगठन हो तो वे अपनी आवाज मजबूती के साथ उठा सकते हैं। इसका प्रतिकूल प्रभाव भी देखने को मिलेगा। वहीं छात्रों को अपनी समस्याएं उठाने के लिए एक प्लेटफार्म भी मिल जाएगा।

पवन लठवाल