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मिल चलाने के लिए पानीपत से मंगाया गन्ना, किसान नाराज

7 वर्ष पहले
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आहुलानाचीनी मिल को चलाने के लिए पर्याप्त गन्ना नहीं पहुंच रहा है। मिल को चलाने के लिए पानीपत से गन्ना मंगाना पड़ा। जिस पर किसानों ने विरोध जताया है। किसानों का कहना है कि मिल जानबूझकर ऐसा कर रहा है। प्रत्येक वर्ष मिल शुरू होने के बाद बाहर से गन्ना मंगाया जाता है। किसानों ने सोमवार को प्रदर्शन किया और बाहर से गन्ना मंगाने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।

भारतीय किसान यूनियन के रोहतक मंडल के प्रधान सत्यवान नरवाल, चांद मलिक, कृष्ण मलिक, भगत सिंह, भोला मलिक, बिजेंद्र आदि ने बताया कि मिल की पेराई क्षमता कम है, इसलिए हर बार मिल क्षेत्र का गन्ना ही नहीं ले पाता। ऐसे में मिल द्वारा बाहर से गन्ना लिया जाएगा तो क्षेत्र के किसानों का गन्ना खेतों में ही खड़ा रहेगा। इससे सीधे किसानों को आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने कहा कि सरकार द्वारा मिल की पेराई क्षमता नहीं बढ़ाई जाती। जिसके कारण मिल गर्मियों तक चलता रहता है। जिन किसानों का गन्ना खेतों में खड़ा रहता है उन्हें घाटा उठाना पड़ता है। एक तो गन्ने का वजन कम हो जाता है। वैसे भी पछेती फसल पर मिल द्वारा रेट कम कर दिया जाता है। ऐसे में किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। किसानों ने मिल अधिकारियों से मांग की है कि मिल में यहां के क्षेत्र के लोगों का ही गन्ना लिया जाना चाहिए।

^ मिल को चलाने के लिए 25 हजार क्विंटल गन्ने की प्रतिदिन जरूरत होती है। परंतु अभी चीनी मिल में करीब 15 हजार क्विंटल गन्ना ही पहुंच रहा है। इतनी मात्रा में गन्ना लेने के बाद मिल को कई घंटे के लिए बंद करना पड़ता है। इसलिए मिल को पानीपत से करीब 16 हजार क्विंटल गन्ना मंगाना पड़ा। किसानों की करीब 2 लाख क्विंटल गन्ने की बोर्डिंग की गई है। परंतु किसान गन्ना लेकर नहीं पहुंच रहे हैं। इसके कारण मिल को रोकना भी पड़ जाता है।\\\'\\\' मंजीतदहिया, कैनमैनेजर, चीनी मिल, आहुलाना।

गन्ना साफ करने के लिए नहीं मिल रही लेबर

किसानोंको गन्ना साफ करने और गन्ने को मिल तक पहुंचाने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे। जिसकी वजह से किसान गन्ना लेकर मिल में नहीं पहुंच पा रहे। किसान राजेश मदीना, बिट्टू मदीना, सचिन, संदीप, अमित, जयभगवान, राममेहर, सुनील, रमेश ने बताया कि किसान धान की झड़ाई में लगे हुए है। मंडी में भी धान पहुंच रहा है, इसलिए काफी संख्या में मजदूर मंडी में कार्य रह हैं। मजदूर मिलने के कारण