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फसलों का 50 प्रतिशत लाभकारी मूल्य दे सरकार

7 वर्ष पहले
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फसलों का 50 प्रतिशत लाभकारी मूल्य देने की मांग को लेकर किसानों ने बुधवार को लघु सचिवालय में प्रदर्शन किया। किसानों ने तहसीलदार श्यामलाल को पीएम और सीएम के नाम को ज्ञापन सौंपा। भाकियू के रोहतक मंडल के अध्यक्ष सत्यवान नरवाल ने कहा कि केंद्र तथा प्रदेश सरकार ने चुनावी घोषणा पत्र में फसल का लाभकारी मूल्य देने का वायदा किया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों को पूरा नहीं किया तो राष्ट्र स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

नरवाल ने कहा कि केंद्र तथा राज्य सरकार ने चुनावों को दौरान किसानों को कुल लागत का 50 प्रतिशत लाभकारी मूल्य देने का वायदा किया था, जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया। प्रदेश में फसलों के दाम बहुत कम हैं तथा लागत अधिक आती है। लागत मूल्य से अधिक होने से प्रदेश के किसान की स्थिति दयनीय हो गई है। उन्होंने कहा कि कर्ज का बोझ बढ़ने से प्रतिवर्ष 20 हजार के करीब किसान आत्महत्या कर लेते हैं। किसानों की आर्थिक स्थिति स्वामी नाथन आयोग लागू करने से ही सुधारी जा सकती है। परंतु सरकार किसान विरोधी नीति अपना रही है जिससे प्रदेश के किसान के पास आंदोलन करने के अलावा अन्य कोई मार्ग नहीं है। यदि प्रदेश सरकार पांच मार्च तक किसानों की मांगे नहीं मानती है तो पांच मार्च को कुरू क्षेत्र में सरकार के खिलाफ संघर्ष का मोर्चा खोला जाएगा।

गोहाना. तहसीलदारश्यामलाल को मूल्य वृद्धि का ज्ञापन सौंपते हुए भाकियू के रोहतक मंडल के अध्यक्ष सत्यवान नरवाल।

गेहूं के मूल्य में वृद्धि को बताया नाममात्र

नरवालने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा गेहूं के समर्थन मूल्य में की गई वृद्धि नाममात्र की है। सरकार ने मूल्य में केवल 50 रुपए की वृद्धि की है जो देश की कुल महंगाई का 3.6 प्रतिशत है जबकि देश में महंगाई 14 प्रतिशत हुई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की रिर्पोट के अनुसार गेहूं की पैदावार पर प्रतिक्विंटल पर 1943 रुपए लागत आती है जबकि सरकार ने गेहूं का समर्थन 1450 रूपए निर्धारित किया गया है। सरकार द्वारा तय किए मूल्य में किसान को 493 रूपए का घाटा होगा।