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कक्षा में दी ट्रैफिक नियमों की परीक्षा, बाहर आते ही भूल गए
प्रत्येकबच्चे को ट्रैफिक नियमों की जानकारी हो, इसके लिए पुलिस और शिक्षा विभाग ने मिलकर अभियान चलाया। अभियान के तहत बच्चों को ट्रैफिक की जानकारी दी गई। इसके अलावा उन्हें पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध कराई गई थी। बुधवार को सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में बच्चों की परीक्षा ली गई। इसमें करीब 55 हजार विद्यार्थियों ने भाग लिया। बच्चों को परेशानी झेलनी पड़े, इसके लिए स्कूल को ही परीक्षा केंद्र बनाया गया था।
बीईओ नवीन नारा ने बताया कि परीक्षा के लिए तीन वर्ग बनाए गए थे। पहले वर्ग में पहली से पांचवीं, दूसरे वर्ग में छठी से आठवीं और तीसरा वर्ग में नौवीं से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को शामिल किया गया था।
परीक्षा सुबह दस बजे से 11 बजे तक चली। एक घंटे में परीक्षार्थियों को ट्रैफिक से संबंधित प्रश्नों के जवाब देने थे। सभी प्रश्न ऑब्जेक्टिव थे। नारा ने बताया कि स्कूल स्तर पर प्रथम, द्वितीय तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले परीक्षार्थियों को जिला स्तर पर होने वाली प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर मिलेगा। यह प्रतियोगिता 13 दिसंबर को सोनीपत में आयोजित की जाएगी। परीक्षा को लेकर बच्चे काफी उत्साहित थे।
हर चौथे दिन एक व्यक्ति की मौत
क्षेत्रमें हर चौथे दिन सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो जाती है। वहीं दुर्घटनाओं का आंकड़ा हर दो दिन में एक है। नवंबर माह में करीब 14 घटनाएं हुई, जिसमें 22 व्यक्ति घायल हो गए। जबकि आठ लोगों की मौत हो गई। पुलिस का प्रयास है कि दुर्घटनाओं के इस ग्राफ को कम किया जाए। इसके लिए जरूरी है चालक ट्रैफिक नियमों की पालना करें। पुलिस का मानना है कि काफी दुर्घटनाएं चालक द्वारा ट्रैफिक नियमों की पालना करने से ही होती हैं।
बिना हेलमेट बैठे हैं तीन छात्र
जोबच्चे परीक्षा में बैठकर ट्रैफिक नियमों से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे, परीक्षा समाप्त होने के बाद अधिकांश छात्र ही ट्रैफिक नियमों को तोड़ते हुए दिखाई दिए। एक बाइक पर तीन-तीन छात्र बैठे हुए थे। इन छात्रों ने हेलमेट भी नहीं लगाया हुआ था। ऐसे में अभियान की सफलता पर सवाल खड़ा हो गया है। क्योंकि केवल किताबी ज्ञान से ट्रैफिक नियम लागू होने वाले नहीं हैं। यह केवल एक दिन की स्थिति नहीं है। आए दिन सड़कों पर ऐसे ही छात्र घूमते रहते हैं।
राजकीय कन्या स्कूल की प्राचार्य गायत्री मलिक का कहना है कि सभी बच्चों को ट्