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सरसों की फसल में आने वाली बीमारी की दी जानकारी
कृषिविभाग ने बनवासा गांव में फार्मर फील्ड स्कूल का साप्ताहिक आयोजन किया। इस दौरान किसानों को सरसों की फसल के विभिन्न चरणों के दौरान आने वाली परेशानियों के बारे में कृषि विशेषज्ञों ने जानकारी दी। बीएओ कथूरा डॉ. जयवीर ने कहा कि सरसों में फूल निकलते समय तथा फलियां आते समय सिंचाई करने से पैदावार अधिक होती है। डॉ. राजीव ने बताया कि यदि किसी किसान ने बिजाई के समय बीज को एजेटोबेक्टर टीके से उपचारित नहीं किया तो वे किसान 50 एमएल के टीके को दस किलो गोबर की खाद में एक गिलास गुड़ का घोल मिलाकर प्रति एकड़ में बिखेर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मिश्रण को बिखेरने से पहले 48 घंटे तक छाया में सुखाकर शाम के समय किसान खेत में बिखेर सकते हैं। फसल के इस चरण में जीवाणु पौधे की जडों में छोटी-छोटी ग्रंथियां बनाते हैं। ये ग्रंथियां वातावरण से नाइट्रोजन को अवशोषित कर नाइट्रेट में बदल कर खाद का काम करते हैं।