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कवायद : टीचर स्कूलों में जाकर बता रहे हैं पॉलीटेक्निक में एडमिशन प्रक्रिया
तकनीकीशिक्षा को बढ़ावा देने के लिए संस्थान खोले। विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप की सुविधा दी। फिर भी प्रतिस्पर्धा के दौर में प्रत्येक क्षेत्र में ट्रेंड युवकों की कमी खल रही है। इसे देखते हुए सरकार ने युवाओं को तकनीकी क्षेत्र की विभिन्न ट्रेड में ट्रेंड करने का निर्णय लिया है। जिससे पढ़ाई पूरी करने के बाद युवा भीड़ का हिस्सा बनकर क्षेत्र विशेष में अपनी अलग पहचान बना सके। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए तकनीकी शिक्षा और शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जिले की जिम्मेदारी बीपीएस पॉलीटेक्निक संस्थान और सांघी स्थित पॉलीटेक्निक संस्थान को सौंपी गई है। संस्थान की टीम स्कूलों में जाकर बच्चों को डिप्लोमा इंजीनियरिंग के दाखिला प्रक्रिया और इसमें भविष्य के बारे में बता रही है। जिससे दसवीं और 12वीं कक्षा पास करने के बाद बच्चों का रुझान इंजीनियरिंग के प्रति बढ़ सके।
बीते कुछ वर्षों डिप्लोमा इंजीनियरिंग के प्रति विद्यार्थियों का रुझान कम हुआ है। इसका मुख्य कारण बच्चों को दाखिला प्रक्रिया के बारे में समय पर जानकारी मिलना है। जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश बच्चे जो पॉलीटेक्निक संस्थान में दाखिला लेना चाहते हैं, वे भी आवेदन नहीं कर पाते। बच्चों को समय से इसकी जानकारी मिले, इसलिए तकनीकी और शिक्षा विभाग ने संयुक्त रूप से जागरूकता अभियान चलाया है। इसके लिए जिला स्तर पर टीमें गठित की गई है। ये टीम स्कूल में जाकर बच्चों को दाखिला प्रक्रिया, डिप्लोमा करने के बाद रोजगार को लेकर संभावनाएं, विभाग द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में बच्चों को बताएगी।
लड़कियोंको फ्री टॉपर को स्कॉलरशिप की सुविधा: बीपीएसमहिला पॉलीटेक्निक संस्थान के प्राचार्य डीवीएस दहिया ने बताया कि सरकार ने तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए दसवीं के टॉपर और डीईटी के टॉपर को स्कॉलरशिप दी जाती है। वहीं लड़की और एससी एसटी के छात्रों की फीस माफ होती है। उन्होंने कहा कि टेस्ट में बैठने के लिए तैयारी करने में यदि कोई परेशानी है तो वह संस्थान में जाकर भी सहायता ले सकते हैं।
डिप्लोमाकरने का यह है फायदा: डिप्लोमाइंजीनियरिंग तीन वर्ष की है। इसके बाद यदि कोई भी छात्र बीटेक करता है तो उसका दाखिला सीधे तीसरे सेमेस्टर यानी दूसरे वर्ष में होता है। डिप्लोमा को 12वीं कक्षा के समान का दर्जा प्राप्त है। इसलिए वह बीटेक भी कर सकता है 12वीं के बाद होने वाले अन्य कोर्स भी।
^ पॉलीटेक्निक संस्थान से इंजीनियरिंग करने के लिए दाखिला प्रक्रिया के बारे में बच्चों को जानकारी मिले, इसे लेकर अभियान चलाया जा रहा है। दाखिला प्रक्रिया अप्रैल-मई में शुरू हो जाती है। आवेदन ऑनलाइन किए जाते हैं। टॉपर विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप भी दी जाती है। दौरे के दौरान देखने में आया है कि बच्चों में जागरूकता की कमी है। बच्चों को दाखिला के साथ-साथ डिप्लोमा करने के बाद रोजगार की संभावना के बारे में बताया जाता है।\\\'\\\'डीवीएस दहिया,प्राचार्य, बीपीएस महिला पॉलीटेक्निक।
बीपीएस पाॅलीटेक्निक संस्थान ने स्कूलों में जाकर बच्चों को डिप्लोमा इंजीनियरिंग के प्रति जागरूक करने के लिए 18 टीमें गठित की है। टीमों का फोकस ग्रामीण क्षेत्र है। ये टीमें ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों को दाखिला प्रक्रिया के बारे में बताएंगी।
यहहै दाखिला प्रक्रिया: आवेदनप्रक्रिया अप्रैल या मई में शुरू हो जाती है। दसवीं कक्षा पास करने वाले छात्र आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन है। आवेदक छात्र को डिप्लोमा इंट्रेंस टेस्ट (डीईटी) में बैठना होगा। मैरिट के आधार पर बच्चों का दाखिला किया जाता है।