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इंजीनियरिंग मैनेजमेंट कॉलेज से मोह कम तो स्कूल के क्षेत्र में आए

6 वर्ष पहले
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सोनीपतकी शिक्षा व्यवस्था बदल रही है। शायद इसलिए कि अब यह क्षेत्र सिर्फ समाज सेवा का होकर एक व्यवसाय का रूप ले चुका है। यह नजरिया इसलिए अब लोगो की जहन में उतर रहा है क्योंकि जिन लोगों ने उच्च शिक्षण संस्थान के रूप में इंजीनियरिंग मैनेजमेंट कॉलेज खोले थे वे देश व्यापी मंदी के चलते मुकाबले में डटे नहीं रह सके। विद्यार्थियों की लगातार कम होती संख्या के कारण कुछ बंद भी हो गए, लेकिन चोला अभी भी शिक्षा का ही चल रहा है। इंजीनियरिंग कॉलेज के इन भवनों पर बोर्ड बदल गया है। अब इन भवनों में स्कूल की घंटी बजाने की व्यवस्था हो गई है। जानकार बताते हैं कि अगर आगामी इंजीनियरिंग एवं प्रबंधन के क्षेत्र में दाखिले अपेक्षित रूप में नहीं हुए तो यह स्थिति और तेजी से आगे बढ़ेगी।

दोइंजीनियरिंग कॉलेज और भी बंद हुए : सोनीपतमें दर्श इंजीनियरिंग कॉलेज वेंकेटेश्वर कॉलेज में मौजूदा साल में कोई दाखिला नहीं हुआ। गोहाना क्षेत्र में भी एक इंजीनियरिंग कॉलेज आगामी सत्र से बंद होने की खबर है। संभावना है कि वहां भी अन्य शिक्षण संस्थान खुल सकते हैं।

स्कूलखोलना मजबूरी भी : चूंकिभूमि की एनओसी शैक्षणिक संस्थान खोले जाने के लिए मिलती है तो स्कूल ही एकमात्र ऐसा विकल्प बचता है जो खुद को घाटे से उबारने के लिए प्रबंधन इसमें प्रयास करता है। जोकि उनकी मजबूरी होती है।

तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में काफी समय से जुड़े डॉ. विजयपाल नैन मानते हैं कि चूंकि बाजार में मंदी है और इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला अपेक्षा अनुरूप नहीं हो रहे हैं। लेकिन बदलती व्यवस्थाओं में एक बार फिर से इंजीनियरिंग क्षेत्र में बूम आएगा। इसके लिए हमें मार्केट की जरूरत के साथ-साथ विद्यार्थी की अनावश्यकता विद्यार्थी मन को समझना होगा।

{रुक्मनी देवी इंजीनियरिंग कॉलेज में अब रुक्मनी देवी पब्लिक स्कूल खुल गया है।

{सोनीपत इंस्टिट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी अब साउथ प्वाइंट इंटरनेशनल स्कूल खुल गया है।

{गुरु प्रेमसुख इंजीनियरिंग कॉलेज अब साउथ प्वाइंट वर्ल्ड स्कूल बनने को है तैयार।